
वीर माधो सिंह भंडारी उत्तराखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, देहरादून में ‘विज्ञान सेतु- कनेक्टिंग स्टूडेंट्स’ कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य विषय ‘युवा शिक्षार्थियों में वैज्ञानिक सोच और STEM शिक्षा को बढ़ावा देना’ था। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, जिज्ञासा, नवाचार और व्यावहारिक अधिगम को प्रोत्साहित करना रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगान और वंदे मातरम के साथ हुई, जिसके बाद पारंपरिक सरस्वती वंदना और दीप प्रज्वलन कर समारोह का औपचारिक आरंभ किया गया।
प्रमुख अतिथि और गरिमामयी उपस्थिति
इस अवसर पर कई प्रमुख हस्तियां और शिक्षाविद उपस्थित रहे:
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मुख्य अतिथि: डॉ. धन सिंह रावत (कैबिनेट मंत्री)
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विशिष्ट अतिथि: डॉ. शिव कुमार शर्मा (राष्ट्रीय संगठन सचिव, विज्ञान भारती)
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विश्वविद्यालय प्रशासन: प्रो. (डॉ.) तृप्ता ठाकुर (कुलपति)
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विशेष आमंत्रित सदस्य:
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प्रो. दुर्गेश पंत (महानिदेशक, यूकॉस्ट)
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डॉ. के.डी. पुरोहित (अध्यक्ष, विद्यार्थी विज्ञान आंदोलन – उत्तराखंड क्षेत्र)
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डॉ. डी.पी. उनियाल (उपाध्यक्ष, विद्यार्थी विज्ञान आंदोलन एवं संयुक्त निदेशक, यूकॉस्ट)
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डॉ. नरेंद्र सिंह (सचिव)
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डॉ. रेजी कुमार पिल्लई (चेयरमैन, इंडिया स्मार्ट ग्रिड फोरम)
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सत्रवार व्याख्यान और विशेषज्ञों के विचार
1. प्रयोगात्मक अधिगम और वैज्ञानिक सोच
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डॉ. लोकेश जोशी एवं डॉ. आशीष रतूड़ी: इन्होंने ‘विद्यार्थी विज्ञान आंदोलन’ और ‘विद्यार्थी विज्ञान मंथन’ की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भौतिकी ओलंपियाड और व्यावहारिक शिक्षा किस तरह विद्यार्थियों की जिज्ञासा को वास्तविक क्षमता में बदल सकती है।
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डॉ. के.डी. पुरोहित: इन्होंने मूलभूत विज्ञान, विद्युत चुंबकीय तरंगों और स्पेक्ट्रम जैसे विषयों को समझने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में वैज्ञानिक प्रश्न पूछने की प्रवृत्ति का होना अनिवार्य है।
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डॉ. शिव कुमार शर्मा: उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे विद्यार्थियों को सार्थक प्रश्न पूछने के लिए प्रेरित करें, क्योंकि जिज्ञासा ही वैज्ञानिक दृष्टिकोण की नींव है।
2. हिमालयी पारिस्थितिकी और तकनीकी भविष्य
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डॉ. डी.पी. उनियाल: इन्होंने विद्यार्थियों को हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के संदर्भ में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उपलब्ध रोजगार व करियर के अवसरों के बारे में बताया।
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प्रो. दुर्गेश पंत: उन्होंने उत्तराखंड और हिमालयी क्षेत्र में तेजी से बदल रहे तकनीकी परिवेश का उल्लेख किया। उन्होंने वैज्ञानिक संस्थानों, समाज और विद्यार्थियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर बल दिया।
3. विकसित भारत-2047 और नशामुक्त युवा
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प्रो. (डॉ.) तृप्ता ठाकुर: कुलपति ने ‘विकसित भारत-2047’ के लक्ष्य को हासिल करने में कौशल विकास और तकनीक की भूमिका रेखांकित की। उन्होंने नशामुक्त युवाओं को देश के निर्माण की आधारशिला बताया और सभी उपस्थित लोगों को नशामुक्त एवं विकसित भारत के संकल्प की शपथ दिलाई।
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डॉ. रेजी कुमार पिल्लई: इन्होंने भारत के विकास में आधुनिक प्रौद्योगिकी के योगदान पर अपने विचार प्रस्तुत किए।
4. मुख्य अतिथि का संबोधन
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डॉ. धन सिंह रावत: कैबिनेट मंत्री ने सम्मानित विद्यार्थियों को बधाई दी और ‘विज्ञान सेतु’ जैसे कार्यक्रमों में अधिक से अधिक भागीदारी का आह्वान किया। उन्होंने विद्यालयों और महाविद्यालयों को प्रदर्शनी, निबंध लेखन और नशामुक्त अभियानों में सक्रिय रूप से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।
विशेष उपलब्धि: समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण इंडिया स्मार्ट ग्रिड फोरम और वीर माधो सिंह भंडारी उत्तराखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के बीच हुआ समझौता ज्ञापन (MoU) रहा। इस समझौते का उद्देश्य भविष्य की तकनीकी आवश्यकताओं, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्रों में दोनों संस्थानों के बीच सहयोग को मजबूत करना है।
धन्यवाद ज्ञापन कार्यक्रम के समापन पर डॉ. डी.पी. उनियाल ने सभी अतिथियों, विशेषज्ञों और प्रतिभागी विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया।



