उत्तराखंडराज्य

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा हिंदी दिवस समारोह का आयोजन एवं उद्बोधन

देहरादून स्थित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में आयोजित ‘हिंदी दिवस समारोह’ के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने साहित्यकारों, भाषाविदों और विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने हिंदी को भारत की राष्ट्रीय चेतना और सांस्कृतिक पहचान की सशक्त अभिव्यक्ति बताते हुए इसे विज्ञान, तकनीक और डिजिटल दुनिया से जोड़ने का आह्वान किया।

समारोह की प्रमुख बातें एवं मुख्यमंत्री का संबोधन

1. राष्ट्रीय चेतना और वैश्विक प्रतिष्ठा

  • सांस्कृतिक पहचान: हिंदी ने देश की विभिन्न भाषाओं, बोलियों और संस्कृतियों के बीच सेतु का कार्य कर ‘विविधता में एकता’ को मजबूत किया है।

  • तकनीक से जुड़ाव: एआई (Artificial Intelligence), रोबोटिक्स और डिजिटल युग में हिंदी को केवल पुस्तकों तक सीमित न रखकर अनुसंधान और आधुनिक तकनीक की मजबूत भाषा बनाना अनिवार्य है।

  • वैश्विक पहचान: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय भाषाओं और संस्कृति को अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर नई प्रतिष्ठा मिली है।

2. उत्तराखंड के महान साहित्यकारों का स्मरण मुख्यमंत्री ने प्रदेश के महान साहित्यकारों के योगदान को रेखांकित किया:

  • सुमित्रानंदन पंत: हिमालय और प्रकृति के अनुपम चितेरे।

  • गौरा पंत ‘शिवानी’: उत्तराखंड के लोकजीवन और स्त्री चेतना को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने वाली लेखिका।

  • चंद्रकुंवर बर्त्वाल: हिमालयी संवेदनाओं को शब्द देने वाले कवि।

  • प्रसून जोशी: आधुनिक साहित्यिक परंपरा को समृद्ध करने वाले रचनाकार।

3. क्षेत्रीय लोकभाषाओं का संरक्षण हिंदी के साथ-साथ गढ़वाली, कुमाऊंनी, जौनसारी, भोटिया, थारू और बंगाणी जैसी समृद्ध लोकभाषाओं व बोलियों के संरक्षण हेतु राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई गई।

साहित्यकारों एवं विद्यार्थियों हेतु सरकारी योजनाएं व सम्मान

  • 126 विजेता सम्मानित: साहित्यिक एवं रचनात्मक लेखन प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 126 विद्यार्थियों को पुरस्कृत किया गया।

  • दीर्घकालीन साहित्य सेवी सम्मान: जीवनभर साहित्य साधना करने वाले मूर्धन्य साहित्यकारों को ₹5 लाख की सम्मान राशि।

  • साहित्य भूषण पुरस्कार: उत्कृष्ट रचनाकारों को ₹5.51 लाख की सम्मान राशि।

  • उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान: हिंदी, गढ़वाली, कुमाऊंनी, जौनसारी, पंजाबी और उर्दू भाषा के साहित्यकारों का सम्मान।

  • डिजिटल व पठन संस्कृति को बढ़ावा: ‘बुके नहीं, बुक देंगे’ पहल, अप्रकाशित साहित्य का संकलन-संरक्षण तथा पुस्तकों के प्रकाशन हेतु आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना।

समारोह में उपस्थित प्रमुख गणमान्य

  • कैबिनेट मंत्री: गणेश जोशी

  • विधायक: सविता कपूर, उमेश शर्मा काऊ

  • शिक्षाविद व अधिकारी: प्रो. जगत सिंह बिष्ट, उमेश नारायण पांडे (भाषा सचिव), मायावती ढकरियाल (भाषा निदेशक) एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति।

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