उत्तराखंडराज्य

हरेला पर्व प्रकृति, लोक संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक: मुख्यमंत्री धामी

देहरादून, 15 जुलाई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को हरेला पर्व की शुभकामनाएं देते हुए इसे प्रकृति संरक्षण, लोक संस्कृति और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि हरेला पर्व हमें अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं से जुड़े रहने की प्रेरणा देता है।

जल स्रोतों और जैव विविधता के संरक्षण का लिया संकल्प

हरेला पर्व की पूर्व संध्या पर जारी संदेश में मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, प्राकृतिक सुंदरता और जैव विविधता के लिए जाना जाता है। ऐसे में राज्य के जल स्रोतों, नदियों और गाड़-गदेरों के संरक्षण एवं पुनर्जीवन के लिए सभी को सामूहिक प्रयास करने होंगे।

उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें प्रत्येक नागरिक की भागीदारी आवश्यक है।

‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान से बढ़ी जागरूकता

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान से देशभर में वृक्षारोपण को लेकर जन-जागरूकता बढ़ी है। हरेला पर्व के अवसर पर वन एवं उद्यान विभाग की ओर से पूरे प्रदेश में व्यापक पौधरोपण अभियान संचालित किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में वृक्षारोपण केवल सामाजिक दायित्व तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह जनभावना से जुड़ा अभियान बन चुका है। इससे आने वाली पीढ़ियों को प्रकृति संरक्षण और अपनी संस्कृति से जुड़े रहने की प्रेरणा मिलेगी।

पर्यावरण संरक्षण में भागीदारी का आह्वान

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से हरेला पर्व के अवसर पर अधिक से अधिक पौधे लगाने और पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की। उन्होंने सामाजिक संगठनों और संस्थाओं से भी इस अभियान में बढ़-चढ़कर भागीदारी करने का आह्वान किया।

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