
वैश्विक चुनौतियों और बदलती आर्थिक परिस्थितियों के बीच, उत्तराखंड सरकार ने राज्य की प्रगति और संसाधनों के संरक्षण के लिए एक दूरदर्शी मार्ग प्रशस्त किया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई हालिया कैबिनेट बैठक में ऊर्जा और ईंधन की बचत को लेकर कई क्रांतिकारी निर्णय लिए गए हैं। यह रणनीति न केवल वर्तमान संकटों का समाधान है, बल्कि एक हरित और आत्मनिर्भर उत्तराखंड की नींव भी है।
ऊर्जा बचत के लिए व्यावहारिक बदलाव और नई कार्यसंस्कृति
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को आगे बढ़ाते हुए आमजन से ऊर्जा बचत को एक व्यक्तिगत जिम्मेदारी के रूप में लेने का आह्वान किया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि छोटे-छोटे व्यावहारिक बदलावों से राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा परिवर्तन लाया जा सकता है। अब सरकारी विभागों में ‘डिजिटल फर्स्ट’ की नीति अपनाई जाएगी, जिसके तहत बैठकों के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग को प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही, निजी क्षेत्र को भी ‘वर्क फ्रॉम होम’ के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा ताकि सड़कों पर वाहनों का दबाव और ईंधन की खपत कम हो सके।
‘नो व्हीकल डे’ और सरकारी खर्च में कटौती की पहल
राज्य सरकार ने फिजूलखर्ची पर लगाम लगाने और पर्यावरण संरक्षण के लिए ‘नो व्हीकल डे’ जैसी अनूठी पहल की तैयारी की है। एक मिसाल पेश करते हुए मुख्यमंत्री और मंत्रियों के काफिलों को आधा करने का निर्णय लिया गया है। सरकारी अधिकारियों के लिए भी दिन में केवल एक वाहन के उपयोग का नियम लागू होगा। परिवहन विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि सार्वजनिक परिवहन प्रणाली को इतना सुदृढ़ बनाया जाए कि आम नागरिक निजी वाहनों के बजाय बसों और अन्य सार्वजनिक साधनों का स्वेच्छा से उपयोग करें।
इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) नीति और बुनियादी ढांचे का विस्तार
उत्तराखंड अब पर्यावरण अनुकूल परिवहन का केंद्र बनने की राह पर है। राज्य में जल्द ही एक व्यापक इलेक्ट्रिक व्हीकल नीति प्रभावी होगी। इसके तहत सरकारी वाहनों की नई खरीद में 50 प्रतिशत हिस्सेदारी इलेक्ट्रिक वाहनों की होगी। सरकार न केवल गाड़ियाँ खरीदेगी, बल्कि पूरे राज्य में चार्जिंग स्टेशनों का एक जाल बिछाएगी ताकि आम जनता को भी ईवी अपनाने में कोई असुविधा न हो।
पर्यटन और ‘मेड इन स्टेट’ अभियान को नई गति
विदेशी दौरों पर अंकुश लगाकर सरकार अब घरेलू पर्यटन पर ध्यान केंद्रित कर रही है। ‘Visit My State’ अभियान के जरिए डेस्टिनेशन वेडिंग, धार्मिक पर्यटन और इको-टूरिज्म को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का लक्ष्य है। इसके अतिरिक्त, स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए “Made in State” अभियान शुरू किया जाएगा। सरकारी खरीद में स्थानीय उत्पादों और ‘मेक इन इंडिया’ के मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाएगा।
कृषि सुधार और वैकल्पिक ऊर्जा का मिशन मोड
किसानों की आय बढ़ाने और स्वास्थ्य की रक्षा के लिए प्राकृतिक खेती और ‘जीरो बजट फार्मिंग’ पर जोर दिया जाएगा। ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लिए ‘पीएम सूर्य घर योजना’ के माध्यम से घर-घर सोलर पैनल और पीएनजी (PNG) कनेक्शन पहुँचाने का कार्य मिशन मोड में किया जाएगा। इसके साथ ही, राज्य में खनन और पावर प्रोजेक्ट्स की मंजूरी के लिए 60 दिन की समयसीमा तय की गई है, जिससे परियोजनाओं में अनावश्यक देरी को समाप्त किया जा सके।
स्वास्थ्य और सतर्कता: संतुलित आहार और निवेश
सरकार ने स्वास्थ्य के प्रति भी जागरूकता बढ़ाने का निर्णय लिया है। स्कूलों, अस्पतालों और होटलों में तेल के उपयोग की समीक्षा की जाएगी और ‘लो-ऑयल मेन्यू’ को बढ़ावा दिया जाएगा। आर्थिक मोर्चे पर, नागरिकों को सोने जैसे अनुत्पादक निवेश के प्रति जागरूक कर अन्य निवेश विकल्पों की ओर प्रेरित किया जाएगा।



