
पंतनगर स्थित गोविंद वल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय परिसर में आज जैव प्रौद्योगिकी परिषद मुख्यालय का लोकार्पण किया गया। इस कार्यक्रम में उत्तराखंड के परिवहन, सूचना प्रौद्योगिकी एवं सुराज, विज्ञान प्रौद्योगिकी मंत्री प्रदीप बत्रा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन और राष्ट्र गीत ‘वंदे मातरम’ के सामूहिक गायन के साथ हुई।
जैव प्रौद्योगिकी को कृषि विकास की रीढ़ बताया गया
मुख्य अतिथि प्रदीप बत्रा ने अपने संबोधन में कहा कि कृषि उत्पादकता बढ़ाने में जैव प्रौद्योगिकी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने और आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर जोर देते हुए रसायन रहित फसल उत्पादन की दिशा में काम करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने वैज्ञानिकों को जैव प्रौद्योगिकी आधारित नई फसल प्रजातियों के विकास के लिए प्रेरित किया।
नवीन उत्पादों का हुआ विमोचन
इस अवसर पर मंत्री प्रदीप बत्रा ने परिषद द्वारा विकसित कई नवाचार उत्पादों का विमोचन किया। इनमें नैनो उर्वरक, हर्बल ग्रीन टी, हर्बल साबुन, समरानी कप और मशरूम अचार शामिल रहे, जिन्हें उन्होंने जनता को समर्पित किया। इससे पहले उन्होंने जैव प्रौद्योगिकी भवन की प्रयोगशाला और पुस्तकालय का निरीक्षण भी किया।
वैज्ञानिक शोध को समाज तक पहुंचाने का लक्ष्य
जैव प्रौद्योगिकी परिषद के निदेशक डॉ. संजय कुमार ने परिषद की विभिन्न गतिविधियों और भविष्य की योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि परिषद का मुख्य उद्देश्य वैज्ञानिक शोध और विकास कार्यों को किसानों, युवाओं और उद्यमियों तक पहुंचाना है, जिससे उन्हें प्रत्यक्ष लाभ मिल सके।
प्रगतिशील किसानों का सम्मान
कार्यक्रम में पूर्व विधायक राजेश शुक्ला और प्रगतिशील किसान डॉ. एस.एस. गौरैया ने भी अपने विचार रखे। इस दौरान उत्कृष्ट कार्य करने वाले प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया गया, जिससे कृषि क्षेत्र में नवाचार को प्रोत्साहन मिला।
वृक्षारोपण के साथ पर्यावरण संदेश
कार्यक्रम के अंत में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत वृक्षारोपण किया गया। इस दौरान मंत्री प्रदीप बत्रा ने रुद्राक्ष का पौधा लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
कार्यक्रम का संचालन और उपस्थिति
कार्यक्रम का संचालन डॉ. मणिन्द्र मोहन और डॉ. कंचन कार्की ने किया। इस अवसर पर कई वैज्ञानिक, शोधकर्ता और अधिकारी उपस्थित रहे, जिनमें डॉ. समीना मेहताब, डॉ. रविंद्र सिंह, डॉ. के.सी. वर्मा, डॉ. रत्ना राय, डॉ. आर.के. शर्मा, डॉ. आशुतोष मिश्रा, डॉ. गुरविंदर सिंह और डॉ. सुमित पुरोहित सहित अन्य अधिकारी, कर्मचारी एवं शोधार्थी शामिल रहे।



