
देहरादून में 24 वर्षीय छात्र एंजेल चकमा की हत्या ने प्रदेश की राजनीति को गरम कर दिया है। उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की नेत्री गरिमा मेहरा दसौनी ने इस घटना को धामी सरकार की लचर कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक विफलता का प्रतीक बताया।
गरिमा मेहरा ने कहा कि शिक्षा और सुरक्षा के लिए प्रसिद्ध देहरादून में पढ़ाई के लिए आए छात्र पर नस्लीय गालियाँ देकर हमला किया गया और उसकी जान चली गई, जो पूरे प्रदेश के लिए चिंताजनक है।

प्रशासन और सरकार की भूमिका पर सवाल
कांग्रेस नेत्री ने यह भी कहा कि यह कोई साधारण आपराधिक घटना नहीं है, बल्कि सरकार और पुलिस प्रशासन की असफलता का परिणाम है। यदि समय रहते प्रशासन सक्रिय होता, तो शायद एक युवा की जान बचाई जा सकती थी।
उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में हाल के दिनों में अपराधों में लगातार वृद्धि हो रही है, खासकर छात्रों और अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की घटनाएँ चिंता का विषय हैं।
मांगें और सुरक्षा उपाय
गरिमा मेहरा ने सरकार से मांग की कि:
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एंजेल चकमा हत्याकांड के दोषियों को फास्ट-ट्रैक कोर्ट में सख्त सजा दी जाए।
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राज्य में छात्रों और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष सेल और हेल्पलाइन शुरू की जाए।
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पुलिस और प्रशासन के लिए संवेदनशीलता प्रशिक्षण अनिवार्य किया जाए।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस दुखद घटना में एंजेल चकमा के परिवार के साथ खड़ी है और मृतक को न्याय दिलाने के लिए हर संभव प्रयास करेगी। साथ ही प्रदेशवासियों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है, जिससे वह मुंह नहीं मोड़ सकती।



