
जनपद में गेहूं की फसल की वास्तविक उत्पादकता का आकलन करने के लिए जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया एक नई भूमिका में नजर आए। उन्होंने तहसील रुद्रपुर के राजस्व ग्राम भूरारानी पहुँचकर किसान अशोक गांधी के खेत में स्वयं दरांती थामी और ‘क्रॉप कटिंग’ (फसल कटाई प्रयोग) की प्रक्रिया को संपन्न किया।
उत्पादकता के आंकड़े: 43 वर्गमीटर में मिला शानदार परिणाम
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के मानकों के अनुसार, फसल की उपज का सटीक अनुमान लगाने के लिए एक निश्चित क्षेत्रफल का चयन किया गया था।
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क्षेत्रफल का मानक: 43.30 वर्गमीटर का एक त्रिभुजाकार (Triangular) प्लॉट चिन्हित किया गया।
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प्राप्त उपज: इस निर्धारित क्षेत्र से कुल 17.900 किलोग्राम गेहूं प्राप्त हुआ। इस डेटा के माध्यम से अब क्षेत्र की औसत पैदावार का सांख्यिकीय विश्लेषण किया जाएगा।
क्रॉप कटिंग का महत्व: नीति निर्धारण का आधार
जिलाधिकारी ने इस अवसर पर बताया कि यह प्रक्रिया केवल एक औपचारिकता नहीं है, बल्कि देश और प्रदेश की आर्थिक नीतियों की धुरी है।
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फसल बीमा: यदि फसल खराब होती है, तो इन आंकड़ों के आधार पर ही किसानों को बीमा क्लेम का भुगतान किया जाता है।
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खाद्य सुरक्षा: सरकार इन आंकड़ों के जरिए ही भविष्य की ‘खाद्य नीति’ और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) जैसे महत्वपूर्ण निर्णय लेती है।
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राष्ट्रीय डेटा: देशव्यापी स्तर पर कृषि उत्पादन का सही ग्राफ तैयार करने के लिए यह प्रयोग हर जनपद में अनिवार्य रूप से किए जाते हैं।
मौके पर मौजूद राजस्व टीम
इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया के दौरान जिलाधिकारी के साथ प्रशासनिक अमला भी मौजूद रहा, जिसमें तहसीलदार दिनेश कुटौला, सहायक भूलेख अधिकारी मदन बिष्ट, कानूनगो राधे सिंह राणा सहित अन्य राजस्व कर्मी शामिल थे। प्रशासन की इस सक्रियता से पारदर्शी आंकड़े एकत्र करने में सहायता मिलेगी।



