टॉप क्लास एजुकेशन स्कीम से एससी छात्रों को मिल रही नई उड़ान, प्रतिष्ठित संस्थानों में खुल रहे सफलता के द्वार

नई दिल्ली। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की टॉप क्लास एजुकेशन स्कीम अनुसूचित जाति (एससी) के मेधावी विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा का मजबूत माध्यम बनकर उभरी है। यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली छात्रों को देश के प्रमुख शिक्षण संस्थानों में अध्ययन का अवसर उपलब्ध करा रही है, जिससे वे तकनीक, कानून, प्रबंधन, डिजाइन, शोध और उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर रहे हैं।
प्रतिष्ठित संस्थानों में पढ़ाई के लिए मिलती है संपूर्ण सहायता
योजना के तहत ऐसे परिवार, जिनकी वार्षिक आय आठ लाख रुपये तक है, उनके मेधावी विद्यार्थियों को IIT, NIT, IIIT, IIM, NLU, NID सहित राष्ट्रीय महत्व के अन्य शिक्षण संस्थानों में पढ़ाई के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। इसमें ट्यूशन फीस, छात्रावास एवं भोजन, पुस्तकों, कंप्यूटर तथा अन्य शैक्षणिक आवश्यकताओं का खर्च शामिल है।
लाभार्थियों की संख्या और बजट में हुआ कई गुना विस्तार
वर्ष 2007-08 में शुरू की गई इस योजना के तहत प्रारंभिक वर्ष में केवल 195 छात्रों को लाभ मिला था। समय के साथ इसका दायरा लगातार बढ़ा और वर्ष 2025-26 में लाभार्थियों की संख्या बढ़कर 4,742 तक पहुंच गई। इसी अवधि में योजना पर होने वाला वार्षिक व्यय 2.17 करोड़ रुपये से बढ़कर 117.19 करोड़ रुपये हो गया है।
देश-विदेश की बड़ी कंपनियों में बना रहे हैं पहचान
योजना का लाभ प्राप्त कर चुके अनेक विद्यार्थियों ने प्रतिष्ठित कंपनियों और संस्थानों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। IIIT इलाहाबाद के छात्र अमूल शटूरिया को 56 लाख रुपये वार्षिक पैकेज पर एक अग्रणी प्रौद्योगिकी कंपनी में नियुक्ति मिली। वहीं सुष्मिता पोथुराजू का चयन 45 लाख रुपये के वार्षिक पैकेज पर अमेजन में हुआ। IIT पालक्काड की छात्रा थंबल्ला सिंधु ने लार्सन एंड टुब्रो कंस्ट्रक्शन में स्थान बनाया, जबकि नालन एस का चयन भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) में हुआ।
तकनीकी शिक्षा से आगे भी मिल रही सफलता
योजना का प्रभाव केवल इंजीनियरिंग और तकनीकी शिक्षा तक सीमित नहीं है। भारतीय प्लांटेशन प्रबंधन संस्थान, बेंगलुरु की बोग्गिति शाइनी जैस्पर ने कॉरपोरेट क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई। वहीं महाराष्ट्र नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के ऋषभ भास्कर लाडे IDBI बैंक में असिस्टेंट लीगल मैनेजर बने। राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान, अहमदाबाद की छात्रा वार्तिका सोनकर ज्वेलरी डिजाइनिंग के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना रही हैं। इसके अलावा शोधार्थी चिंतला संजय कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और मशीन लर्निंग के क्षेत्र में महत्वपूर्ण अनुसंधान कार्य कर रहे हैं।
आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में निभा रही अहम भूमिका
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अनुसार, यह योजना केवल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रतिभाशाली युवाओं को आत्मविश्वास, समान अवसर और नेतृत्व क्षमता विकसित करने का मंच भी प्रदान करती है। योजना के माध्यम से तैयार हो रहे युवा ज्ञान-आधारित, समावेशी और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।



