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NEET-UG 2026 पेपर लीक मामला: CBI ने 13 आरोपियों के खिलाफ दाखिल की चार्जशीट, 360 गवाह और 422 दस्तावेज बनाए आधार

नई दिल्ली। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने NEET-UG 2026 प्रश्नपत्र लीक मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए 13 गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी है। आरोपियों पर आपराधिक साजिश रचने, धोखाधड़ी करने, आपराधिक विश्वासघात, साक्ष्य मिटाने, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम तथा सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के तहत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। फिलहाल सभी आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं।

चार्जशीट में सैकड़ों गवाह और दस्तावेज शामिल

CBI द्वारा दाखिल चार्जशीट में कुल 360 गवाहों, 422 दस्तावेजों और 43 भौतिक साक्ष्यों का उल्लेख किया गया है। जांच एजेंसी का दावा है कि इन साक्ष्यों के आधार पर पूरे मामले की कड़ी को विस्तार से अदालत के सामने रखा गया है।

शिकायत के बाद शुरू हुई जांच

उच्च शिक्षा विभाग, भारत सरकार ने 12 मई 2026 को NEET-UG 2026 परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक और अन्य अनियमितताओं की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत मिलने के तुरंत बाद CBI ने उसी दिन एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की। मामले की गंभीरता को देखते हुए एजेंसी ने 72 अधिकारियों और 8 साइबर फॉरेंसिक विशेषज्ञों की विशेष टीमों का गठन किया।

कई राज्यों में छापेमारी, महत्वपूर्ण सबूत बरामद

जांच के दौरान CBI ने महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली समेत विभिन्न राज्यों के 92 स्थानों पर एक साथ छापेमारी की। इस कार्रवाई में डिजिटल डिवाइस, संचार उपकरण और कई अहम दस्तावेज बरामद किए गए। बाद में इन सभी सामग्रियों की फॉरेंसिक जांच कराई गई।

NTA के तीन विशेषज्ञ भी गिरफ्तार

CBI के अनुसार, जांच में प्रश्नपत्र लीक होने के स्रोत से लेकर लाभ लेने वाले अभ्यर्थियों तक पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ है। इस मामले में पहली गिरफ्तारी 13 मई 2026 को हुई थी। गिरफ्तार 13 आरोपियों में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के रसायन विज्ञान, जीवविज्ञान और भौतिकी विषय के तीन विशेषज्ञ भी शामिल हैं। इसके अलावा प्रश्नपत्र लीक कर उसे आगे पहुंचाने वाले कई बिचौलियों और कोचिंग संस्थानों से जुड़े दो लोगों को भी गिरफ्तार किया गया है।

बैंक खाते और लॉकर किए गए फ्रीज

जांच एजेंसी ने आरोपियों के बैंक खातों, बैंक लॉकरों और एक डीमैट खाते को भी फ्रीज कर दिया है। CBI का कहना है कि डिजिटल फॉरेंसिक जांच, हस्तलेखन विशेषज्ञों की रिपोर्ट और शैक्षणिक विशेषज्ञों की राय से यह स्पष्ट हुआ है कि परीक्षा आयोजित होने से पहले ही लीक प्रश्नपत्रों का प्रसार किया गया था।

जांच अभी जारी, दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई

CBI ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच और फॉरेंसिक विश्लेषण अभी जारी है। एजेंसी का कहना है कि जांच में सामने आने वाले सभी दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी और पूरे मामले की तह तक पहुंचने के लिए हर पहलू की जांच की जा रही है।

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