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एलीट देशों के क्लब में भारत, अब हवा में ही ढेर होंगी दुश्मन की मिसाइलें; DRDO का बड़ा कारनामा

नई दिल्ली: भारत के रक्षा अनुसंधान संस्थान ने लगातार तीन मिसाइल फ्लाइट टेस्ट सफलतापूर्वक पूरे करके एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इन परीक्षणों में बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस और एंटी-शिप युद्ध क्षमताओं से जुड़ी तकनीकों का प्रदर्शन किया गया।

डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन ( DRDO ) ने कहा कि इन ट्रायल्स में लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल के खतरों के खिलाफ भारत के मल्टी-लेयर्ड डिफेंस सिस्टम और मध्यम दूरी पर दुश्मन के नौसैनिक लक्ष्यों को निशाना बनाने की क्षमता का प्रदर्शन किया गया।

लक्ष्यों को किया इंटरसेप्ट

DRDO के मुताबिक मल्टी-लेयर्ड बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) सिस्टम ने टेस्ट के दौरान अपने तय लक्ष्यों को सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट किया। इंटरसेप्टर्स ने आने वाले बैलिस्टिक मिसाइल लक्ष्यों को रोका और नष्ट किया, जिससे उभरते और एडवांस्ड मिसाइल खतरों का मुकाबला करने के लिए विकसित की गई टेक्नोलॉजी की पुष्टि हुई।

रेंज 2 हजार से 5 हजार KM

DRDO ने दो इंटरसेप्टर मिसाइलों का परीक्षण किया। ये मिसाइलें 2,000 km से 5,000 km की रेंज वाली दुश्मन की मिसाइलों को नष्ट करने में सक्षम हैं और इन्हें इंटरमीडिएट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल (IRBM) की श्रेणी में रखा गया है। मोदी सरकार ने इन इंटरसेप्टर मिसाइलों की पहचान का खुलासा नहीं किया है, लेकिन ये ‘एक्सो-एटमॉस्फेरिक’ (वायुमंडल के बाहर काम करने वाली) और ‘एंडो-एटमॉस्फेरिक’ (वायुमंडल के भीतर काम करने वाली) दोनों तरह की हैं। सूत्रों का कहना है कि टेस्ट ट्रायल पूरे होने के बाद, इन इंटरसेप्टर मिसाइलों को जल्द ही ‘यूजर ट्रायल’ के लिए भेजा जाएगा।

पाकिस्तान को तगड़ा झटका

सूत्रों के मुताबिक, DRDO ने बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस को इसलिए बहुत ज्यादा प्राथमिकता दी है, क्योंकि पाकिस्तान ‘फतेह-I’, ‘फतेह-II’ और चीन में बनी ‘P282’ जैसी लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें विकसित कर रहा है।

चुनिंदा देशों की लिस्ट में भारत

संगठन ने कहा कि इन सफल परीक्षणों ने भारत को उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में ला खड़ा किया है, जिनके पास बैलिस्टिक मिसाइल हमलों, जिनमें लंबी दूरी और अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों (ICBMs) से होने वाले खतरे भी शामिल हैं, से बचाव की क्षमता है।

समुद्री हमले के विकल्प मजबूत

एक अलग मील के पत्थर में डीआरडीओ ने नौसेना एंटी-शिप मिसाइल-मीडियम रेंज (एनएएसएम-एमआर) का पहला उड़ान परीक्षण भी किया। परीक्षण ने मध्यम दूरी पर मिसाइल की जहाज-रोधी क्षमता का प्रदर्शन किया, जिससे भारतीय सशस्त्र बलों के समुद्री हमले के विकल्प मजबूत हुए।

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