उत्तराखंडराज्य

चंपावत में ‘सावन उत्सव-2026’ की धूम, लोक संस्कृति के रंगों से सजा आयोजन

चंपावत। सेवा संकल्प फाउंडेशन के तत्वावधान में रविवार को जीजीआईसी सभागार में ‘सावन उत्सव-2026’ का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में दूरदराज क्षेत्रों से पहुंची महिलाओं, छात्राओं और स्थानीय लोगों ने उत्साह के साथ भाग लिया। समारोह का शुभारंभ सेवा संकल्प फाउंडेशन की फाउंडर ट्रस्टी गीता पुष्कर धामी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की माता बिशना देवी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

लोक संस्कृति और परंपराओं की दिखी झलक

सावन उत्सव के दौरान उत्तराखंड की लोक संस्कृति और पारंपरिक विरासत के विविध रंग देखने को मिले। विद्यालय और चंपावत डिग्री कॉलेज की छात्राओं ने हिमाचली नृत्य, नंदा-सुनंदा सहित विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित नृत्य प्रस्तुति दर्शकों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र रही।

वहीं, 60 से 65 वर्ष की आयु की 13 वरिष्ठ महिलाओं के समूह ने नशा मुक्ति अभियान पर आधारित विशेष प्रस्तुति दी। उनकी प्रस्तुति को दर्शकों ने खूब सराहा और तालियों से उत्साहवर्धन किया।

महिला स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों के लगाए स्टॉल

कार्यक्रम के दौरान गीता धामी ने महिला स्वयं सहायता समूहों की ओर से लगाए गए विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन किया। इनमें मेहंदी, पारंपरिक ऐपण कला, लोहे के बर्तन, जूट से बने बैग और विभिन्न पहाड़ी उत्पादों के स्टॉल शामिल रहे।

महिलाओं और बालिकाओं के लिए लाइव मेहंदी, सेल्फी प्वाइंट और झूले समेत कई मनोरंजक गतिविधियां भी आयोजित की गईं। आयोजन में प्रतिभागियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

‘मिसेज सावन क्वीन’ और ‘सुपर ईजा डांस’ ने खींचा ध्यान

सावन उत्सव में ‘मिसेज सावन क्वीन-2026’, सुपर ईजा डांस, झोड़ा-चांचरी और सातूं-आंठू (गौरा-महेश) जैसी प्रतियोगिताओं ने लोगों का खूब मनोरंजन किया। महिलाओं का उत्साह बढ़ाने के लिए सबसे लंबी प्रतिभागी, सबसे दूर से पहुंची प्रतिभागी, सुंदर मुस्कान और आकर्षक पारंपरिक परिधान जैसी श्रेणियों में ‘सावन सरप्राइज अवॉर्ड्स’ भी प्रदान किए गए।

विभिन्न प्रतियोगिताओं में विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कार दिए गए, जबकि सभी प्रतिभागियों को सहभागिता पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।

‘एक पेड़ मां के नाम’ के तहत रोपा रुद्राक्ष का पौधा

गीता धामी ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत रुद्राक्ष का पौधा रोपा। उन्होंने कहा कि पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाओं की बड़ी संख्या में मौजूदगी ने उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवंत कर दिया।

उन्होंने कहा कि सुपर ईजा डांस, मिसेज सावन क्वीन और झोड़ा-चांचरी जैसी गतिविधियों का उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी लोक संस्कृति और परंपराओं से जोड़ना है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराया जा सकता है।

पौधों की बच्चों की तरह देखभाल करने की अपील

गीता धामी ने कहा कि ‘माता भूमिः पुत्रोहं पृथिव्याः’ की भावना के साथ सेवा संकल्प फाउंडेशन प्रदेशभर में पौधरोपण अभियान चला रहा है। उन्होंने महिलाओं से अपील की कि उन्हें उपहार के रूप में मिले पौधों की बच्चों की तरह देखभाल करें और उनके संरक्षण की जिम्मेदारी निभाएं।

उन्होंने कहा कि संस्था महिला सशक्तीकरण के साथ-साथ शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी लगातार कार्य कर रही है। समाज के विभिन्न वर्गों को साथ लेकर संस्था जनहित के कार्यों को आगे बढ़ा रही है।

15 महिलाओं को मिला ‘नंदा शिखर सम्मान’

कार्यक्रम के दौरान सामाजिक क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली 15 महिलाओं को ‘नंदा शिखर सम्मान’ से सम्मानित किया गया। इनमें महिला स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा कार्यकर्ता और शिक्षिकाएं शामिल रहीं।

जनप्रतिनिधियों और महिलाओं की रही बड़ी भागीदारी

कार्यक्रम में दर्जा राज्य मंत्री श्याम नारायण पांडे, सुभाष बगौली, हेमा जोशी, मुकेश महराना, विधायक प्रतिनिधि प्रकाश तिवारी, नगर पालिका अध्यक्ष प्रेमा पांडेय, ब्लॉक प्रमुख अंचला बोहरा, भाजपा जिलाध्यक्ष गोविंद सामंत, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य सतीश पांडे, महिला मोर्चा अध्यक्ष दीपा जोशी और प्रदेश महामंत्री मुकेश कलखुड़िया समेत विभिन्न जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी मौजूद रहे।

इसके अलावा महिला स्वयं सहायता समूहों की सदस्य, छात्राएं और बड़ी संख्या में महिलाएं भी कार्यक्रम में शामिल हुईं।

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