उत्तराखंडराज्य

एनसीबी का बड़ा एक्शन, 182 करोड़ रुपये की कैप्टागन ड्रग्स जब्त

नई दिल्ली में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए ‘ऑपरेशन रोनेपिल’ के तहत 227.7 किलोग्राम कैप्टागन टैबलेट और पाउडर बरामद किया है। इस मामले में एक सीरियाई नागरिक को भी गिरफ्तार किया गया है। जब्त ड्रग्स की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 182 करोड़ रुपये आंकी गई है।

भारत में पहली बार कैप्टागन की बड़ी खेप जब्त

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने इस सफलता पर एनसीबी टीम की सराहना करते हुए कहा कि यह कार्रवाई सरकार की “जीरो टॉलरेंस” नीति का सशक्त उदाहरण है। उन्होंने बताया कि ‘ऑपरेशन रोनेपिल’ के जरिए पहली बार भारत में “कैप्टागन” नामक ड्रग की बड़ी खेप पकड़ी गई है, जिसका इस्तेमाल मध्य-पूर्व के कई देशों में व्यापक रूप से किया जाता है।

विदेशी एजेंसी की सूचना पर हुई कार्रवाई

एनसीबी को एक विदेशी एजेंसी से जानकारी मिली थी कि भारत का इस्तेमाल कैप्टागन तस्करी के ट्रांजिट पॉइंट के रूप में किया जा रहा है। इसी सूचना के आधार पर 11 मई को दिल्ली के नेब सराय इलाके में छापेमारी की गई।

जांच के दौरान एक मकान से 31.5 किलोग्राम कैप्टागन टैबलेट बरामद की गईं, जिन्हें चपाती कटिंग मशीन के अंदर छिपाकर रखा गया था। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि यह खेप सऊदी अरब के जेद्दा भेजी जानी थी।

मुंद्रा पोर्ट से भी भारी मात्रा में ड्रग्स बरामद

पूछताछ के बाद एनसीबी ने 14 मई को गुजरात के मुंद्रा स्थित कंटेनर फैसिलिटेशन स्टेशन में कार्रवाई करते हुए 196.2 किलोग्राम कैप्टागन पाउडर बरामद किया। यह ड्रग्स कंटेनर में भेड़ की ऊन के नाम पर सीरिया से आयात की गई थी।

जांच एजेंसियों के मुताबिक पूरी खेप को खाड़ी देशों, खासकर सऊदी अरब भेजने की तैयारी थी।

भारत को ट्रांजिट हब बनाने की साजिश का खुलासा

एनसीबी के अनुसार यह भारत में कैप्टागन की अब तक की पहली बड़ी जब्ती है। जांच में अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट द्वारा भारत को ट्रांजिट हब के रूप में इस्तेमाल करने की साजिश का भी खुलासा हुआ है।

एजेंसी अब इस नेटवर्क से जुड़े हवाला कनेक्शन, लॉजिस्टिक्स चैन, विदेशी रिसीवरों और अन्य संदिग्ध लिंक की गहन जांच कर रही है।

लोगों से मांगी सहयोग की अपील

एनसीबी ने नागरिकों से अपील की है कि मादक पदार्थों से जुड़ी किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत मानस हेल्पलाइन 1933 पर दें। एजेंसी ने भरोसा दिलाया है कि सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।

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