
देहरादून स्थित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय (मुख्य सेवक सदन) में हिंदी दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ‘हिमालयन संस्कृति’ पत्रिका के पहले अंक (प्रवेशांक) का विमोचन किया। इस दौरान उन्होंने हिमालय को भारत की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक चेतना का मुख्य आधार बताते हुए इसके संरक्षण को सामूहिक जिम्मेदारी करार दिया।
कार्यक्रम की मुख्य बातें एवं मुख्यमंत्री का संबोधन
1. हिमालयी विरासत और पर्यावरण चेतना
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सांस्कृतिक आधार: हिमालय केवल एक भौगोलिक क्षेत्र नहीं है, बल्कि देश की जीवंत लोक परंपराओं और विरासत का प्रतीक है।
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संरक्षण की आवश्यकता: समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाने के साथ-साथ हिमालयी पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता और जागरूकता बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है।
2. ‘हिमालयन संस्कृति’ पत्रिका का उद्देश्य
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सांस्कृतिक संदर्भ स्रोत: यह पत्रिका हिमालयी राज्यों की लोक आस्थाओं, रीति-रिवाजों, लोक कला, लोक साहित्य, इतिहास और पर्यावरण से जुड़े पहलुओं को जन-जन तक पहुँचाने का कार्य करेगी।
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युवाओं से जुड़ाव: युवा पीढ़ी को हिमालय की विशिष्ट पहचान से परिचित कराने और शोधार्थियों के लिए एक प्रामाणिक दस्तावेज के रूप में कार्य करने में यह सहायक होगी।
संपादकीय दृष्टिकोण एवं उपस्थित गणमान्य
संपादक रजनीश कौंसवाल का वक्तव्य: पत्रिका के संपादक रजनीश कौंसवाल ने बताया कि प्रवेशांक में हिमालयी संस्कृति के बहुआयामी पक्षों—जैसे लोक स्मृतियों, पारंपरिक ज्ञान, सामाजिक सरोकारों और पर्यावरणीय चेतना को एक साथ सहेजने का प्रयास किया गया है।
समारोह में उपस्थित प्रमुख व्यक्तित्व:
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जनप्रतिनिधि एवं संगठन पदाधिकारी: उमेश शर्मा काऊ (विधायक, रायपुर), सिद्धार्थ अग्रवाल (भाजपा महानगर अध्यक्ष), विनोद खंडूरी।
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मंदिर समिति पदाधिकारी: प्रसाद सती (उपाध्यक्ष, बदरी-केदार मंदिर समिति), राजपाल जड़धारी (सदस्य)।
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अन्य गणमान्य: वरिष्ठ पत्रकार हरीश कोठारी, विपिन एवं अनेक संस्कृति प्रेमी उपस्थित रहे।



