राष्ट्रिय

महिला सशक्तिकरण की नई दिशा: आर्थिक क्षेत्र में बढ़ती भागीदारी

नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सितंबर 2023 में संसद में प्रस्तुत नारी शक्ति वंदन अधिनियम के माध्यम से महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने के बाद अब उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में भी व्यापक कदम उठाए जा रहे हैं। खासतौर पर एमएसएमई सेक्टर में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ती नजर आ रही है।

महिला उद्यमिता में उल्लेखनीय वृद्धि

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 की शुरुआत तक उद्यम पंजीकरण पोर्टल और उद्यम असिस्ट प्लेटफॉर्म पर 3.11 करोड़ से अधिक महिला-नेतृत्व वाले उद्यम पंजीकृत हो चुके हैं। यह देश के कुल पंजीकृत MSME का लगभग 40 प्रतिशत है, जो महिला उद्यमिता के तेजी से विस्तार को दर्शाता है।

आसान हुई व्यवसाय शुरू करने की प्रक्रिया

सरकार द्वारा पंजीकरण प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन, पेपरलेस और स्व-घोषणा आधारित बनाए जाने से महिलाओं के लिए व्यवसाय शुरू करना पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान हो गया है। जनवरी 2023 में शुरू किए गए उद्यम असिस्ट प्लेटफॉर्म ने विशेष रूप से असंगठित क्षेत्र की महिलाओं को औपचारिक अर्थव्यवस्था से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

बहुआयामी नीति ढांचा तैयार

एमएसएमई मंत्रालय ने महिलाओं के लिए एक व्यापक नीति ढांचा तैयार किया है, जिसमें वित्तीय सहायता, तकनीकी पहुंच, डिजिटलीकरण, बाजार उपलब्धता और कौशल विकास जैसे आठ प्रमुख क्षेत्रों पर कार्य किया जा रहा है।

सरकारी योजनाओं से मिल रहा प्रोत्साहन

प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत पिछले पांच वर्षों में 3.2 लाख से अधिक महिला उद्यमों को समर्थन दिया गया है। इस योजना के कुल लाभार्थियों में महिलाओं की हिस्सेदारी 39 प्रतिशत रही है।

वहीं क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट के अंतर्गत महिला उद्यमियों को 90 प्रतिशत तक गारंटी कवर दिया जा रहा है, जिससे उन्हें बिना जमानत के ऋण प्राप्त करना आसान हो गया है।

सरकारी खरीद में महिलाओं को प्राथमिकता

सरकारी खरीद नीति में बदलाव करते हुए यह अनिवार्य किया गया है कि केंद्रीय मंत्रालय, विभाग और सार्वजनिक उपक्रम अपनी वार्षिक खरीद का कम से कम 3 प्रतिशत महिला-स्वामित्व वाले MSME से करें। वित्त वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा बढ़कर 3.5 प्रतिशत तक पहुंच चुका है, जो इस दिशा में सकारात्मक प्रगति को दर्शाता है।

कौशल और गुणवत्ता सुधार पर फोकस

जीरो डिफेक्ट जीरो इफेक्ट योजना के तहत महिला उद्यमों को प्रमाणन शुल्क पर 100 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है। इसके अलावा महिला कोयर योजना, एमएसएमई-टीईएएम योजना और यशस्विनी अभियान जैसी पहलें महिलाओं को कौशल, विपणन और जागरूकता के स्तर पर सशक्त बना रही हैं।

समन्वय और निगरानी के लिए विशेष तंत्र

वूमेन एंटरप्रेन्योरशिप सेल विभिन्न योजनाओं के समन्वय और प्रभावी निगरानी का कार्य कर रहा है, ताकि महिलाओं तक योजनाओं का अधिकतम लाभ पहुंचाया जा सके।

आर्थिक विकास में महिलाओं की निर्णायक भूमिका

विशेषज्ञों का मानना है कि ये पहलें केवल योजनाएं नहीं, बल्कि एक व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं, जिसका उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक विकास की मुख्यधारा में शामिल करना है। स्वयं सहायता समूहों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से महिलाओं में आत्मविश्वास और उद्यमिता की भावना को भी बढ़ावा मिल रहा है।

सरकार का स्पष्ट मानना है कि ‘नारी शक्ति’ केवल सामाजिक सशक्तिकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की आर्थिक प्रगति का मजबूत आधार है। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने में महिला उद्यमियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button