योगी सरकार ने बहाल किया संत रविदास नगर जिले का नाम, बसपा सुप्रीमो ने जताया सरकार का आभार

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने भदोही का नाम बदलकर फिर से संत रविदास नगर करने के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के फैसले से गदगद हैं। नाम बदलने के ऐलान पर मायावती ने योगी सरकार का आभार जताते हुए एक और जिले का नाम बदलने की मांग रख दी है। उन्होंने कासगंज का नाम बदलकर बसपा के संस्थापक मान्यवर कांशीराम के नाम पर करने की मांग की है। मायावती ने ही अपनी सरकार के दौरान भदोही का नाम बदलकर संतरविदास नगर और कासगंज का नाम कांशीराम के नाम पर किया था। बाद में अखिलेश यादव की सपा सरकार ने दोनों जिलों का पुराना नाम बहाल किया था। मायावती ने योगी सरकार का आभार जताने के साथ ही सपा पर निशाना भी साधा है।
मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर इसे लेकर लंबी पोस्ट लिखी है। इस पोस्ट में योगी सरकार का अभार जताने के साथ सपा पर तीखा हमला बोला है। मायावती ने लिखा कि बसपा सरकार द्वारा भदोही को जिला मुख्यालय का दर्जा देते हुए ‘संत रविदास नगर’ बनाया गया था। लेकिन बाद में आई समाजवादी पार्टी की सरकार ने अपनी संकीर्ण और जातिवादी मानसिकता के तहत इसका नाम बदल दिया था। अब फिर से भदोही का नाम ‘संत रविदास नगर’ करने पर बसपा राज्य सरकार की आभारी है।
सपा पर तीखा हमला
मायावती ने कहा कि उत्तर प्रदेश में बसपा की सरकार के दौरान प्रशासनिक व्यवस्था को दुरुस्त करने और जनहित को बेहतर बनाने के लिए कई नए जिले, तहसील और पुलिस जोन बनाए गए थे। इनमें से अधिकतर जिलों के नाम दलित, शोषित और अन्य पिछड़े वर्गों (ओबीसी) के महान संतों, गुरुओं और महापुरुषों के सम्मान में रखे गए थे। इसी क्रम में संत रविदास नगर, छत्रपति शाहूजी महाराज नगर और भीम नगर जैसे जिले अस्तित्व में आए थे। कहा कि सपा सरकार ने केवल राजनीतिक द्वेष और अपनी जातिवादी संकीर्ण सोच के कारण इन जिलों के नाम बदल दिए।
कासगंज का नाम बदलने की मांग
मायावती ने कासगंज जिले का जिक्र करते हुए कहा कि ब्रज क्षेत्र के विकास के लिए इसे जिला मुख्यालय बनाकर मान्यवर श्री कांशीराम जी नगर नाम दिया गया था। सपा सरकार ने अपने तथाकथित ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) विरोधी रवैये के कारण इसका भी नाम बदल दिया था।
कांशीराम के नाम पर जिले के लिए एडवांस में दिया आभार
मायावती ने योगी सरकार से मांग की है कि जिस तरह संत रविदास नगर का नाम बहाल किया गया है, ठीक उसी तरह कासगंज का नाम भी मान्यवर कांशीराम जी के नाम पर फिर से बदला दिया जाए। उन्होंने कहा कि यदि यह कार्य 9 अक्टूबर को मान्यवर कांशीराम जी के परिनिर्वाण दिवस से पहले या उसी दिन कर दिया जाए तो बसपा इसके लिए राज्य सरकार की विशेष रूप से आभारी रहेगी।



