
देहरादून: उत्तराखंड अनुसूचित जाति आयोग की ओर से धर्मपुर डांडा स्थित आयोग कार्यालय में दो दिवसीय जनसुनवाई का आयोजन किया गया। आयोग के अध्यक्ष मुकेश कुमार की अध्यक्षता में आयोजित इस सुनवाई में प्रदेश भर से आए कुल 47 मामलों पर गहन विचार-विमर्श किया गया, जिनमें से 27 शिकायतों का मौके पर ही त्वरित निस्तारण कर दिया गया। शेष बचे मामलों के शीघ्र और न्यायसंगत समाधान के लिए संबंधित विभागीय अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए गए।
प्रदेश के विभिन्न जिलों से पहुंचे पीड़ित, इन मुख्य मुद्दों पर हुई सुनवाई
इस जनसुनवाई में देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर, पौड़ी, टिहरी, उत्तरकाशी, चमोली, नैनीताल और रुद्रप्रयाग समेत कई जिलों के शिकायतकर्ताओं ने अपनी समस्याएं रखीं।
प्रमुख शिकायतें व विषय:
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भूमि व राजस्व: भूमि पर अवैध कब्जा, पैमाइश, दाखिल-खारिज और कब्जा दिलाने से जुड़े मामले।
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सामाजिक व सेवा मामले: जातिगत भेदभाव, उत्पीड़न, छात्रवृत्ति भुगतान, पदोन्नति (Promotion) और सेवा बहाली।
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अन्य जनसमस्याएं: पेयजल कनेक्शन, आउटसोर्स कर्मचारियों की समस्याएं और मृतक आश्रित प्रमाण पत्र।
अब जिलों में लगेंगे बड़े जनसुनवाई शिविर: अध्यक्ष मुकेश कुमार
आयोग के अध्यक्ष मुकेश कुमार ने कहा कि पीड़ित व्यक्तियों को त्वरित, पारदर्शी और प्रभावी न्याय दिलाना आयोग का प्राथमिक उद्देश्य है।
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जिला स्तरीय शिविर: उन्होंने घोषणा की कि अनुसूचित जाति समाज की समस्याओं को उनके द्वार पर हल करने के लिए जल्द ही विभिन्न जिलों में बड़े स्तर पर जनसुनवाई शिविर आयोजित किए जाएंगे, ताकि शिकायतों के निस्तारण के साथ-साथ पात्र लोगों को सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ भी मिल सके।
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अधिकारियों को हिदायत: उन्होंने अधिकारियों से जिम्मेदारी के साथ कार्य करने का आह्वान करते हुए कहा कि यदि स्थानीय स्तर पर ही समयबद्ध निस्तारण हो जाए, तो जनता को आयोग के दफ्तर तक आने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।
बैठक में ये अधिकारी रहे मौजूद
जनसुनवाई के दौरान आयोग के सदस्य विशाल मुखिया, भागीरथी कुंजवाल, सुनीता देवी, सचिव कविता टम्टा, विधि सलाहकार राजू मेहर और तीरपन सिंह समेत कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
“अनुसूचित जाति वर्ग के अधिकारों की रक्षा और उन्हें न्याय दिलाना हमारी प्राथमिकता है। अधिकारियों की मौजूदगी से मामलों के त्वरित निस्तारण में तेजी आई है।” — मुकेश कुमार, अध्यक्ष (उत्तराखंड अनुसूचित जाति आयोग)



