
देहरादून/ईटानगर। उत्तराखंड के कृषि मंत्री गणेश जोशी ने अरुणाचल प्रदेश की राजधानी ईटानगर में आयोजित मोपिन महोत्सव की स्वर्ण जयंती समारोह में हिस्सा लिया। इस अवसर पर उन्होंने केंद्रीय मंत्री किरन राजू को मोपिन महोत्सव की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं प्रेषित की।
स्थानीय परंपराओं और सांस्कृतिक आयोजनों का अनुभव
कृषि मंत्री ने समारोह के दौरान स्थानीय जनजातीय परंपराओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से भाग लिया। उन्होंने कहा कि मोपिन महोत्सव केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि प्रकृति, कृषि और समृद्धि का प्रतीक है। यह भारतीय संस्कृति की विविधता और समृद्ध परंपराओं का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करता है।
सांस्कृतिक उत्सवों से बढ़ती है देश की एकता
गणेश जोशी ने कहा कि इस प्रकार के सांस्कृतिक उत्सव देश की एकता और अखंडता को मजबूत करते हैं और विभिन्न राज्यों के बीच आपसी भाईचारे को प्रोत्साहित करते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि हमारे तीज-त्योहार ही हमें एक सूत्र में बांधने का कार्य करते हैं।
मोपिन महोत्सव: प्रकृति, आस्था और सामूहिकता का प्रतीक
कृषि मंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि मोपिन महोत्सव जीवन में खुशहाली, सकारात्मकता और सामाजिक एकता का संदेश देता है। इस अवसर पर उन्होंने स्थानीय लोगों के साथ पारंपरिक रीति-रिवाजों में भाग लिया और सभी को शुभकामनाएं दीं।
मोपिन महोत्सव का सांस्कृतिक महत्व
मोपिन महोत्सव अरुणाचल प्रदेश की गालो जनजाति का अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है। यह पर्व मुख्यतः कृषि से जुड़ा होता है और इसका उद्देश्य अच्छी फसल, समृद्धि, सुख-शांति और बुरी शक्तियों से सुरक्षा की कामना करना है।
पर्व की विशेषताएँ और रीति-रिवाज
त्योहार के दौरान लोग “मोपिन आनी” (देवी) की पूजा-अर्चना करते हैं और प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करते हैं। इस पर्व का एक प्रमुख आकर्षण “पोपिर” नृत्य है, जिसमें महिलाएं सफेद पारंपरिक पोशाक पहनकर समूह में नृत्य करती हैं। साथ ही, लोग एक-दूसरे के चेहरे पर चावल का पेस्ट लगाते हैं, जिसे पवित्रता, शुभता और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है।
प्रमुख उपस्थित गणमान्य व्यक्ति
इस समारोह में अरुणाचल प्रदेश सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री तुमके बागरा, भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष गुमसेन लोलेन, प्रदेश महासचिव कागे दाबी, प्रदेश उपाध्यक्ष तारह सीता, प्रदेश उपाध्यक्ष जौमगे चिन्यो और अन्य कई स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।



