आध्यात्म

आज का पंचांग (Aaj Ka Panchang) 11 मार्च 2026 : आज शीतला अष्टमी तिथि, जानें शुभ मुहूर्त का समय

शीतला अष्टमी का पर्व माता शीतला को समर्पित है, जो होली के पश्चात कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इसे उत्तर भारत के राज्यों जैसे राजस्थान, उत्तर प्रदेश और गुजरात में ‘बसोड़ा’ के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन घर में भोजन पकाने के लिए आग नहीं जलाई जाती है। चलिए पढ़ते हैं शीतला अष्टमी (Sheetala Ashtami 2026) का पंचांग।

आज का पंचांग (Panchang 11 March 2026)

संवत – 2082

चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि समाप्त – प्रातः 4 बजकर 19 मिनट तक (12 मार्च)

वज्र – सुबह 9 बजकर 12 मिनट तक

करण –

वज्र – सुबह 9 बजकर 12 मिनट तक

बलव – दोपहर 3 बजकर 8 मिनट तक

वार – बुधवार

सूर्योदय और सूर्यास्त का समय

सूर्योदय – सुबह 6 बजकर 36 मिनट से

सूर्यास्त – शाम 6 बजकर 27 मिनट पर

चंद्रोदय का समय – देर रात 1 बजकर 54 मिनट से (12 मार्च)

चन्द्रास्त का समय – सुबह 11 बजकर 7 मिनट पर

आज के शुभ मुहूर्त

अभिजीत मुहूर्त – आज अभिजीत मुहूर्त नहीं है

अमृत काल – दोपहर 12 बजकर 8 मिनट से दोपहर 1 बजकर 55 मिनट तक

आज के अशुभ समय

राहुकाल – दोपहर 12 बजकर 31 मिनट से दोपहर 2 बजे तक

गुलिकाल – सुबह 11 बजकर 2 मिनट से दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक

यमगण्ड – सुबह 8 बजकर 5 मिनट से सुबह 9 बजकर 33 मिनट तक

आज का नक्षत्र

आज चंद्रदेव ज्येष्ठा नक्षत्र में विराजमान रहेंगे।

ज्येष्ठा नक्षत्र: रात 10 बजे तक

स्थान: 16°40’ वृश्चिक राशि से 30°00’ वृश्चिक राशि तक

नक्षत्र स्वामी: बुधदेव

राशि स्वामी: मंगलदेव

देवता: इंद्र (देवताओं के राजा)

प्रतीक: कुंडल, छाता या ताबीज

सामान्य विशेषताएं: अत्यधिक महत्वाकांक्षी, बुद्धिमान, चतुर योजनाकार, साहसी, व्यावहारिक, तार्किक, दार्शनिक, हाजिरजवाब, स्वाभिमानी, संकट में माहिर, थोड़े गुस्सैल, कम मित्र वाले और लक्ष्य के प्रति कठोर।

आज शीतला अष्टमी (बसोड़ा) है

पूजा मुहूर्त: सुबह 6 बजकर 36 से शाम 6 बजकर 27 तक

अवधि: 11 घंटे 51 मिनट

अधिकांश परिवार एक दिन पहले ही पकवान तैयार कर लेते हैं और अष्टमी के दिन बासी भोजन का ही सेवन करते हैं। माना जाता है कि माता शीतला चेचक, खसरा और अन्य संक्रमण वाली बीमारियों को नियंत्रित करती हैं। भक्त रोगों से बचाव और उत्तम स्वास्थ्य के लिए मां की पूजा पूरी श्रद्धा और सहजता से करते हैं। इस दिन स्वच्छता का विशेष महत्व होता है और भक्त शांतिपूर्ण ढंग से अपनी पूजा संपन्न करते हैं।

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