साउथ सिनेमा की दिग्गज गायिका जमुना रानी का निधन, 6000 से ज्यादा गानों को दी आवाज

नई दिल्ली. साउथ सिनेमा की दिग्गज प्लेबैक सिंगर जमुना रानी का गुरुवार को बेंगलुरु में निधन हो गया. 88 साल की उम्र में उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कहा. अपने दशकों लंबे करियर में जमुना रानी ने तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम और सिंहली भाषाओं में 6000 से भी ज्यादा गानों को अपनी सुरीली आवाज दी.
1950 और 60 के दशक में जमुना रानी की गायकी का जबरदस्त जादू चला. उन्होंने ऐसे कई सदाबहार गाने गाए जो आज भी लोगों की जुबान पर चढ़े हुए हैं. जमुना रानी ने बेंगलुरु स्थित अपने घर में अंतिम सांस ली.
किस वजह से जमुना रानी का हुआ निधन?
उम्र संबंधी बीमारियों के चलते जमुना रानी का निधन हुआ. काफी समय से उनकी सेहत ठीक नहीं थी. बेंगलुरु में वह अपने परिवार के साथ रह रही थीं. उनका अंतिम संस्कार बेंगलुरु के कल्लाहल्ली में किया गया, जहां फिल्म जगत की हस्तियां, उनका परिवार और चाहने वाले उन्हें आखिरी विदाई दी.
जमुना रानी ने 7 साल की उम्र में शुरू किया सफर
साल 1938 में आंध्र प्रदेश में जन्मीं जमुना रानी के संगीत का सफर महज 7 साल की उम्र में ही शुरू हो गया था. उन्होंने 1946 में तेलुगु फिल्म ‘त्यागय्या’ से बतौर प्लेबैक सिंगर अपने करियर की शुरुआत की थी. इसके बाद 1952 में फिल्म ‘कल्याणी’ के जरिए उन्होंने तमिल सिनेमा में कदम रखा और देखते ही देखते पूरे साउथ सिनेमा की सबसे लोकप्रिय आवाजों में शुमार हो गईं.
कमल हासन की फिल्म के लिए गाया गाना
1950 और 60 के दशक में सफलता की बुलंदियों को छूने के बाद भी जमुना रानी का संगीत से नाता कभी नहीं टूटा. उन्होंने 80 के दशक तक गानों की रिकॉर्डिंग जारी रखी. उनके बाद के दौर के यादगार गानों में कमल हासन की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘नायकन’ का प्रसिद्ध गाना ‘नान सिरित्थाल दीपावली’ शामिल है, जिसे दिग्गज संगीतकार इलैयाराजा ने जमुना रानी और एमएस राजेश्वरी के साथ मिलकर तैयार किया था.
तमिलनाडु सरकार ने पुरस्कार से किया सम्मानित
भारतीय संगीत में उनके अभूतपूर्व योगदान के लिए जमुना रानी कई बड़े सम्मानों से नवाजा गया. तमिलनाडु सरकार ने साल 1998 में उन्हें प्रतिष्ठित ‘कलैमामणि पुरस्कार’ से सम्मानित किया था, इसके अलावा कला के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए उन्हें ‘अन्ना पुरस्कार’ से भी सम्मानित किया गया था.

