
रुद्रपुर में गर्भधारण पूर्व एवं प्रसव पूर्व निदान-तकनीक (लिंग चयन प्रतिषेध) अधिनियम, 1994 के अनुपालन को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी एवं समुचित प्राधिकारी डॉ. के. के. अग्रवाल के निर्देशों के तहत साफ किया गया है कि इस कानून का उल्लंघन करने वालों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा।
रुद्रपुर ब्लॉक में पांच केंद्रों का निरीक्षण अभियान
शनिवार को स्वास्थ्य विभाग की पीसी-पीएनडीटी टीम ने रुद्रपुर ब्लॉक में चार पंजीकृत अल्ट्रासाउंड केंद्रों और एक आईवीएफ केंद्र का निरीक्षण किया। यह कार्रवाई अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी एवं जिला नोडल अधिकारी (पीसी-पीएनडीटी) डॉ. एस. पी. सिंह के नेतृत्व में की गई।
निरीक्षण के दौरान फुटेला हॉस्पिटल, फुटेला आईवीएफ सेंटर, बी.डी. पाठक हॉस्पिटल, जीवनदीप डायग्नोस्टिक सेंटर और न्यूरो अल्ट्रासाउंड सेंटर को जांच के दायरे में रखा गया।
दस्तावेजों और प्रक्रियाओं की विस्तृत जांच
निरीक्षण टीम ने अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत सभी आवश्यक रिकॉर्ड्स की बारीकी से जांच की। इसमें फॉर्म-F की प्रविष्टियां, मरीजों के रिकॉर्ड, बिना रेफरल स्लिप के अल्ट्रासाउंड, रजिस्टर में किसी भी प्रकार की कटिंग या ओवरराइटिंग, मशीनों का भौतिक सत्यापन और चेतावनी बोर्ड की उपलब्धता शामिल रही।
टीम ने यह भी सुनिश्चित किया कि किसी भी केंद्र पर लिंग परीक्षण से संबंधित अवैध गतिविधि न हो।
नियम तोड़ने पर कड़ी सजा का प्रावधान
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि पीसी-पीएनडीटी एक्ट के तहत नियमों का उल्लंघन गंभीर अपराध है। पहली बार दोषी पाए जाने पर तीन वर्ष तक की सश्रम कैद और जुर्माना तथा दोबारा अपराध पर पांच वर्ष तक की सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान है।
इसके अलावा रजिस्ट्रेशन रद्द करने, मशीनें जब्त करने और संबंधित चिकित्सक का लाइसेंस निरस्त कराने जैसी कार्रवाई भी की जा सकती है।
‘जीरो टॉलरेंस’ नीति लागू
स्वास्थ्य विभाग ने जिले में लिंगानुपात को प्रभावित करने वाली किसी भी गतिविधि के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ और ‘जीरो मर्सी’ नीति अपनाने की बात कही है। अधिकारियों ने बताया कि अब केवल निरीक्षण नहीं, बल्कि सीधी कानूनी कार्रवाई की जाएगी और रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी जा रही है।
जनता से अपील और सख्त चेतावनी
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने जनता से अपील की है कि यदि कोई व्यक्ति लिंग परीक्षण के लिए उकसाता है या इसके बदले पैसे मांगता है, तो उसकी सूचना विभाग को दें। सूचना देने वाले की पहचान गोपनीय रखी जाएगी और इनाम भी दिया जाएगा।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि लिंग परीक्षण कराना या कराना एक गैर-जमानती अपराध है और इसमें शामिल लोगों को सीधी जेल की सजा हो सकती है। उन्होंने समाज से अपील की कि बेटियों को बचाने और भ्रूण हत्या जैसी कुप्रथाओं को रोकने में सहयोग करें।



