अंतर्राष्ट्रीय

रूस ने यूक्रेन पर बैलिस्टिक मिसाइल दागा, यूक्रेन ने 370 ड्रोन से किया ताबड़तोड़ हमला

शनिवार को मॉस्को में यूक्रेनी ड्रोन हमलों के बाद घंटों तक घना काला धुआं छाया रहा. इलेक्ट्रोस्टाल में वाइल्डबेरीज का लॉजिस्टिक्स कॉम्प्लेक्स और नोगिंस्क में तेल डिपो में आग लग गई. ये जगहें मॉस्को की राजधानी से करीब 50 KM पूर्व में हैं. स्थानीय गवर्नर और मेयर ने इस हमले की पुष्टि की. रूस ने यूक्रेन पर युद्ध शुरू होने के बाद अब तक की सबसे बड़ी संख्या में बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया है. यूक्रेन के विदेश मंत्री ने यह जानकारी दी. यूक्रेन की वायुसेना ने बताया कि रूस ने रात भर में 41 मिसाइलें लॉन्च कीं, जिनमें से 18 मिसाइलों को उन्होंने सफलतापूर्वक मार गिराया.

यूक्रेनी ड्रोन ने इलेक्ट्रोस्टाल स्थित वाइल्डबेरीज के बड़े लॉजिस्टिक्स सेंटर को निशाना बनाया. यह एक बड़ा गोदाम है. साथ ही नोगिंस्क में तेल डिपो पर भी हमला हुआ. नोगिंस्क डिपो में 24 स्टोरेज टैंक हैं. यह मॉस्को क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण ईंधन केंद्र है. आग इतनी तेज लगी कि काला धुआं आसमान में कई घंटों तक छाया रहा.

मॉस्को के मेयर ने बताया कि इस क्षेत्र की ओर 370 से ज्यादा ड्रोन दागे गए. रूसी डिफेंस सिस्टम ने कई ड्रोन को रोक लिया, लेकिन कुछ ड्रोन अपने टारगेट तक पहुंच गए और आग लग गई. आग बुझाने के लिए दमकल की कई टीमें मौके पर पहुंचीं. क्षेत्रीय गवर्नर ने कहा कि ईंधन आपूर्ति पर असर पड़ सकता है, लेकिन तुरंत कोई बड़ा खतरा नहीं है.

जेलेंस्की का बयान और जवाबी कार्रवाई

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा कि ये लॉजिस्टिक्स केंद्र रूसी हमलों के जवाब में निशाना बनाए गए. उन्होंने आरोप लगाया कि ये केंद्र रूस को ड्रोन बनाने वाले प्रतिबंधित पुर्जे मुहैया कराते थे. यूक्रेन का कहना है कि रूस उसके शहरों पर हमले कर रहा है, इसलिए वह रूस के अंदर सैन्य और सहायक ठिकानों को निशाना बना रहा है.

यह हमला यूक्रेन-रूस युद्ध में एक नया मोड़ दिखाता है. यूक्रेन अब रूस की गहरी भूमि पर ड्रोन हमले बढ़ा रहा है. इससे पहले भी मॉस्को और आसपास के इलाकों में कई बार ड्रोन हमले हो चुके हैं, लेकिन इस बार लॉजिस्टिक्स और तेल सुविधाओं को निशाना बनाया गया, जो युद्ध प्रयासों को सपोर्ट करती हैं.

रूस की डिफेंस सिस्टम की चुनौतियां

रूस की राजधानी मॉस्को को मजबूत एयर डिफेंस सिस्टम से सुरक्षित माना जाता है. S-400 और अन्य सिस्टम लगे हैं, जो आमतौर पर ड्रोन और मिसाइलों को रोक लेते हैं. लेकिन 370 से ज्यादा ड्रोन एक साथ लॉन्च करने से कुछ ड्रोन बच निकले. इससे रूसी रक्षा विशेषज्ञों में चिंता बढ़ गई है.

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और सरकार ने इन हमलों की निंदा की है. उन्होंने इसे आतंकवादी कार्रवाई बताया. रूसी मीडिया ने भी इस घटना को प्रमुखता दी और यूक्रेन पर आरोप लगाया कि वह नागरिक ठिकानों को निशाना बना रहा है. हालांकि जेलेंस्की का दावा है कि ये सैन्य सप्लाई से जुड़े केंद्र थे.

नोगिंस्क तेल डिपो मॉस्को क्षेत्र के लिए ईंधन का बड़ा केंद्र है. यहां से पेट्रोल, डीजल और अन्य ईंधन आसपास के इलाकों में सप्लाई होता है. अगर यहां ज्यादा नुकसान हुआ तो स्थानीय ईंधन कीमतों और आपूर्ति पर असर पड़ सकता है. वाइल्डबेरीज रूस का बड़ा ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म है. इसका लॉजिस्टिक्स कॉम्प्लेक्स सामान की सप्लाई चेन का महत्वपूर्ण हिस्सा है.

युद्ध के कारण रूस की अर्थव्यवस्था और सप्लाई चेन पहले से ही दबाव में है. प्रतिबंधों के बावजूद रूस ड्रोन और हथियार बना रहा है. यूक्रेन का आरोप है कि ऐसे गोदाम इन गतिविधियों को सपोर्ट करते हैं.

युद्ध का बढ़ता दायरा

यह हमला यूक्रेन-रूस युद्ध के 3 साल पूरे होने के आसपास हुआ है. शुरू में युद्ध मुख्य रूप से यूक्रेन की सीमा पर था, लेकिन अब दोनों पक्ष एक-दूसरे की गहराई में हमले कर रहे हैं. यूक्रेन ने लंबी दूरी के ड्रोन विकसित किए हैं, जो रूस के अंदरूनी इलाकों तक पहुंच सकते हैं. रूस की ओर से यूक्रेनी शहरों पर मिसाइल और ड्रोन हमले जारी रखे हुए हैं.

इससे दोनों देशों में नागरिकों की जान जा रही है. आर्थिक नुकसान हो रहा है. यूरोपीय देश और अमेरिका यूक्रेन को हथियार और मदद दे रहे हैं, जबकि रूस को चीन, ईरान और उत्तर कोरिया जैसे देशों से समर्थन मिल रहा है.

मॉस्को क्षेत्र में काला धुआं छाने से स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई. कई इलाकों में हवा प्रदूषित हो गई. स्वास्थ्य अधिकारियों ने सतर्क रहने की सलाह दी. आग पर काबू पा लिया गया है, लेकिन जांच जारी है.

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे हमले युद्ध को लंबा खींच सकते हैं. रूस अपनी डिफेंस मजबूत कर रहा है, लेकिन यूक्रेन की ड्रोन क्षमता बढ़ रही है. अंतरराष्ट्रीय समुदाय शांति वार्ता की बात कर रहा है, लेकिन दोनों पक्ष अभी हार मानने को तैयार नहीं दिखते.

मॉस्को पर यूक्रेनी ड्रोन हमला इस युद्ध की नई वास्तविकता को दिखाता है. अब कोई जगह पूरी तरह सुरक्षित नहीं है. दोनों देशों को भारी नुकसान हो रहा है. आम नागरिक सबसे ज्यादा प्रभावित हैं. भविष्य में अगर बातचीत नहीं हुई तो ऐसे हमले बढ़ सकते हैं, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button