
देहरादून। पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (पिटकुल) के प्रबंध निदेशक पी. सी. ध्यानी ने गढ़वाल क्षेत्र में निर्माणाधीन विद्युत परियोजनाओं के निरीक्षण भ्रमण के तहत 29 जनवरी 2026 को रेलवे की आर.वी.एन.एल. परियोजना के अंतर्गत निर्माणाधीन 132 केवी GIS उपसंस्थान ऋषिकेश का निरीक्षण किया।
निर्माण कार्यों की प्रगति और गुणवत्ता की समीक्षा
निरीक्षण के दौरान GIS बिल्डिंग, कंट्रोल रूम बिल्डिंग, आउटडोर फाउंडेशन तथा निर्माण सामग्री की स्थिति का गहन परीक्षण किया गया। कार्य की धीमी प्रगति पर असंतोष व्यक्त करते हुए प्रबंध निदेशक ने कार्यदायी संस्था और संबंधित अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई तथा तत्काल मानव शक्ति बढ़ाने और शेष सामग्री की आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
समयबद्ध कार्य पूर्ण करने के सख्त निर्देश
अधिशासी और सहायक अभियंताओं को सामग्री की समय पर आपूर्ति, निर्माण एवं ऊर्जीकरण की विस्तृत कार्ययोजना बनाकर योजनाबद्ध तरीके से कार्य पूर्ण करने को कहा गया। सभी कार्य 20 मार्च 2026 तक पूर्ण करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए। उन्होंने टीम को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि प्रत्येक परियोजना में Quality, Quantity, Safety और Timely Completion को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से निगरानी के निर्देश
निरीक्षण के दौरान 220 केवी ऋषिकेश के अधिशासी अभियंता को साइट से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से निर्देश दिए गए कि निर्माण कार्य प्रतिदिन प्रातः 7:30 बजे से प्रारंभ किया जाए तथा दैनिक प्रगति रिपोर्ट वीडियो के माध्यम से प्रस्तुत की जाए।
132 केवी GIS उपसंस्थान रानीहाट का निरीक्षण
इसके पश्चात रेलवे की आर.वी.एन.एल. परियोजना के अंतर्गत निर्माणाधीन 132 केवी GIS उपसंस्थान रानीहाट, श्रीनगर का निरीक्षण किया गया। यहां भी GIS बिल्डिंग, कंट्रोल रूम बिल्डिंग, निर्माण सामग्री और गुणवत्ता मानकों की समीक्षा की गई। कार्य की धीमी गति पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए गए।
श्रमिकों की संख्या बढ़ाने और तय समय साबित करने के आदेश
साइट पर कार्यरत समस्त मानव शक्ति की समीक्षा की गई और श्रमिकों से संवाद कर उन्हें कार्य के प्रति प्रेरित किया गया। कार्यदायी संस्था को तीन दिवस के भीतर 100 अतिरिक्त श्रमिक तैनात करने तथा शेष सामग्री की आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। सहायक और अवर अभियंताओं को योजनाबद्ध ढंग से कार्य पूर्ण कराने को कहा गया। समस्त कार्य 15 मार्च 2026 तक पूर्ण करने के निर्देश दिए गए।
महिला अभियंताओं को किया गया प्रोत्साहित
निरीक्षण के दौरान दोनों महिला अवर अभियंताओं को “लड़की हूं, लड़ सकती हूं, काम कर सकती हूं” कहते हुए उनके कार्य की सराहना की गई और उन्हें प्रोत्साहित किया गया।
400 केवी ट्रांसमिशन लाइन और टॉवरों का निरीक्षण
इसके बाद 400 केवी पीपलकोटी–कर्णप्रयाग–श्रीनगर ट्रांसमिशन लाइन के पैकेज-2 और 3 के अंतर्गत टॉवर संख्या 69, 71 और 77A का निरीक्षण किया गया, जहां अलकनंदा नदी और राष्ट्रीय राजमार्ग की क्रॉसिंग की जा रही है।
सुरक्षा मानकों और ऊर्जीकरण पर विशेष जोर
पहाड़ी क्षेत्रों में स्थापित टॉवरों की सुरक्षा दीवार की गुणवत्ता बनाए रखने, सिविल एवं डिफेंस एविएशन नियमों के अनुपालन तथा आवश्यक डे-नाइट मार्कर लगाने के निर्देश दिए गए। साथ ही CEA, NRLDC और CTU से संबंधित सभी दस्तावेजी औपचारिकताएं पूर्ण कर लाइन को शीघ्र ऊर्जीकृत करने के निर्देश दिए गए।
प्रस्तावित 66 केवी उपसंस्थान नंदप्रयाग का निरीक्षण
देर सायं प्रस्तावित 66 केवी उपसंस्थान नंदप्रयाग के लिए चयनित भूमि का निरीक्षण किया गया और शीघ्र भूमि हस्तांतरण के निर्देश दिए गए। इस दौरान मैसर्स हिमऊर्जा के प्रबंधक से नेटवर्क सुधार से जुड़े वाणिज्यिक विषयों पर बैठक करने को लेकर चर्चा भी की गई।
वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी से त्वरित समाधान
निरीक्षण के दौरान मुख्य अभियंता, महाप्रबंधक, अधीक्षण अभियंता और परियोजना से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जिससे वित्त, डिजाइन और वाणिज्यिक मामलों का त्वरित समाधान मौके पर ही सुनिश्चित किया गया।



