
कांवड़ मेले के सफल समापन के बाद हरिद्वार में जिला प्रशासन और नगर निगम ने व्यापक स्तर पर सफाई अभियान चलाकर शहर को पुनः स्वच्छ, सुव्यवस्थित और पर्यावरणीय रूप से सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया। इस विशेष पहल का उद्देश्य तीर्थनगरी की पवित्रता और सौंदर्य को बनाए रखना था, ताकि श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों को स्वच्छ वातावरण मिल सके।
सामाजिक संगठनों की सक्रिय भागीदारी
इस अभियान में शांतिकुंज और पतंजलि सहित कई सामाजिक संस्थाओं ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। प्रशासन और समाज के इस सामूहिक प्रयास ने “स्वच्छ हरिद्वार – स्वस्थ हरिद्वार” के संकल्प को नई ऊर्जा प्रदान की। यह पहल दर्शाती है कि जब सरकारी तंत्र और समाज साथ आते हैं तो बड़े से बड़े लक्ष्य को भी आसानी से प्राप्त किया जा सकता है।
चमगादड़ टापू में विशेष सफाई अभियान
16 फरवरी को चमगादड़ टापू क्षेत्र में विशेष स्वच्छता अभियान चलाया गया। सेनेटरी इंस्पेक्टर धीरेन्द्र सेमवाल के नेतृत्व में शांतिकुंज के लगभग 200 स्वयंसेवकों ने श्रमदान कर कांवड़ यात्रियों द्वारा छोड़े गए कचरे को एकत्रित किया। इस दौरान करीब 8 टन अपशिष्ट को हटाकर वैज्ञानिक पद्धति से निस्तारण के लिए भेजा गया। यह प्रयास पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सराहनीय कदम साबित हुआ।
रोड़ी बेलवाला क्षेत्र में युवाओं की भागीदारी
रोड़ी बेलवाला क्षेत्र में मुख्य सेनेटरी इंस्पेक्टर अर्जुन सिंह के मार्गदर्शन में पतंजलि के 80 विद्यार्थियों ने सफाई अभियान की कमान संभाली। युवाओं ने पूरे उत्साह के साथ करीब 4 टन कचरा एकत्र किया। नई पीढ़ी की यह सक्रिय भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि स्वच्छता केवल जिम्मेदारी नहीं, बल्कि एक सामाजिक संस्कार बन चुका है।
प्रशासन का आभार और समन्वय की शक्ति
नगर निगम ने इस अभियान में सहयोग देने वाले सभी स्वयंसेवकों, संस्थाओं और अधिकारियों के प्रति आभार व्यक्त किया। प्रशासनिक तत्परता, सामाजिक संगठनों के सहयोग और आमजन की सहभागिता के समन्वित प्रयासों से हरिद्वार तेजी से अपनी सामान्य स्वच्छता व्यवस्था की ओर अग्रसर हो रहा है। यह अभियान न केवल सफाई का कार्य है, बल्कि सामूहिक उत्तरदायित्व और जागरूकता का प्रतीक भी है।



