
देहरादून में राज्य में लागू नवीन आपराधिक कानूनों के सुचारू और प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर सचिवालय में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता गृह सचिव शैलेश बगोली ने की। इस बैठक में पुलिस, कारागार, न्यायपालिका, अभियोजन और फॉरेंसिक विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लेकर मौजूदा प्रगति और चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की।
अगस्त 2026 तक पूर्ण अनुपालन के निर्देश
समीक्षा बैठक के दौरान गृह सचिव ने सभी संबंधित विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए कि अगस्त 2026 के अंत तक राज्यभर में नए आपराधिक कानूनों का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने क्रियान्वयन व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा करते हुए थाना स्तर पर कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने पर जोर दिया।
नागरिक-केंद्रित पुलिसिंग और ई-एफआईआर पर फोकस
गृह सचिव ने जनपद स्तरीय अधिकारियों को नागरिक-केंद्रित पुलिसिंग को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने ई-एफआईआर प्रणाली के व्यापक उपयोग को सुनिश्चित करने और एफआईआर की विवेचना व निस्तारण प्रक्रिया में सुधार लाने पर विशेष बल दिया। उन्होंने यह भी कहा कि मामलों का निस्तारण 60 और 90 दिनों की निर्धारित समय-सीमा के भीतर होना चाहिए ताकि न्यायिक प्रक्रिया अधिक तेज और प्रभावी बन सके।
डिजिटल एकीकरण और “वन डेटा, वन एंट्री” पर जोर
बैठक में सभी ऑनलाइन प्रणालियों के एकीकरण पर भी विशेष चर्चा हुई। गृह सचिव ने “एक डेटा, एक प्रविष्टि” के सिद्धांत को लागू करने के निर्देश दिए और विभिन्न विभागों के डिजिटल प्लेटफॉर्म को आपस में जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया। इससे प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ने की उम्मीद है।
जेल सुधार और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के निर्देश
कारागार विभाग को निर्देश दिए गए कि सभी बंदियों की शत-प्रतिशत न्यायालयीन पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनिश्चित की जाए। इस कदम का उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, तेज और तकनीक-सक्षम बनाना है, जिससे समय और संसाधनों की बचत हो सके।
समयबद्ध अनुपालन पर सख्त निर्देश
बैठक के अंत में गृह सचिव ने सभी विभागों को निर्देशों का समयबद्ध और सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि नए आपराधिक कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन राज्य की कानून-व्यवस्था प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाएगा और नागरिकों के लिए न्याय व्यवस्था को अधिक सुलभ बनाएगा।



