
सितारगंज के नयागांव और उसके आस-पास के क्षेत्रों में वायरल हेपेटाइटिस (पीलिया) के संदिग्ध मामले सामने आने से हड़कंप मच गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए शुक्रवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. के.के. अग्रवाल ने प्रभावित इलाकों का सघन स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने जमीनी स्तर पर स्थिति का बारीकी से जायजा लिया और राहत व बचाव कार्य में जुटी स्वास्थ्य टीमों को महामारी पर लगाम कसने के लिए कड़े निर्देश जारी किए।
‘डोर-टू-डोर’ सर्वे में न हो लापरवाही, लक्षण दिखते ही तुरंत होगी जांच
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. के.के. अग्रवाल ने मैदान में तैनात स्वास्थ्य कर्मियों को दो टूक हिदायत दी कि क्षेत्र के हर एक घर में जाकर (डोर-टू-डोर) सर्वे किया जाए और इस कार्य में किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने निर्देश दिए कि पीलिया, बुखार और पेट दर्द जैसे लक्षणों से पीड़ित मरीजों की पहचान कर उनकी तुरंत ब्लड टेस्ट और अन्य जरूरी जांचें सुनिश्चित की जाएं, ताकि समय रहते इलाज शुरू हो सके।

दूषित पानी पर गहराया शक: क्लोरिनेशन और पानी उबालकर पीने की सलाह
इस बीमारी के फैलने का मुख्य स्रोत दूषित पेयजल होने की प्रबल आशंका जताई जा रही है। इसे देखते हुए सीएमओ ने स्थानीय प्रशासन के साथ बेहतर तालमेल बिठाकर ग्रामीणों को जागरूक करने पर जोर दिया। स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीणों को अनिवार्य रूप से स्वच्छ और उबला हुआ पानी पीने की सलाह दी है। इसके साथ ही, क्षेत्र के सभी सार्वजनिक जल स्रोतों में क्लोरिनेशन की प्रक्रिया को युद्धस्तर पर तेज करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि पानी के संक्रमण को खत्म किया जा सके।
रैपिड रिस्पॉन्स टीम ने लिए पानी के सैंपल, सेहत से नहीं होगा कोई समझौता
महामारी की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग की रैपिड रिस्पॉन्स टीम (RRT) पहले से ही क्षेत्र में सक्रिय है। टीम द्वारा सार्वजनिक पेयजल स्रोतों, हैंडपंपों और पीड़ित परिवारों के घरों से पानी के सैंपल एकत्र कर लैब टेस्ट के लिए भेज दिए गए हैं। सीएमओ ने साफ तौर पर कहा है कि आम जनता की सेहत और जिंदगी के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। विभाग पूरी स्थिति पर लगातार पैनी नजर रख रहा है।
पीड़ित परिवारों के बीच पहुँचे आला अधिकारी
इस महत्वपूर्ण स्थलीय दौरे के दौरान मुख्य चिकित्सा अधिकारी के साथ संबंधित क्षेत्र के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. कुलदीप यादव और आईडीएसपी (इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम) टीम के डॉ. संतोष कुमार पांडेय सहित कई विशेषज्ञ मुख्य रूप से मौजूद रहे। अधिकारियों ने प्रभावित परिवारों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर उनके स्वास्थ्य का हाल जाना और उन्हें ढांढस बंधाते हुए हर संभव चिकित्सकीय सहायता का भरोसा दिया।



