
देहरादून। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत के पूर्व विशेषाधिकारी (OSD) चंदन सिंह जीना के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) और अन्य जांच एजेंसियों की कार्रवाई से प्रदेश की राजनीति में हड़कंप मच गया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, छापेमारी के दौरान बड़ी मात्रा में नकदी और आभूषण बरामद हुए हैं।
इस घटनाक्रम के बाद हरीश रावत ने सोशल मीडिया पर एक विस्तृत और भावुक पोस्ट साझा करते हुए अपनी स्थिति स्पष्ट की है। नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने कांग्रेस के सभी संगठनात्मक पदों से हटने का बड़ा ऐलान किया है।
1. पूर्व OSD पर लगे आरोपों से लज्जित, कांग्रेस के पदों से त्यागपत्र
हरीश रावत ने स्वीकार किया कि चंदन सिंह जीना उनके OSD रहे हैं और उन्होंने सरकार व संगठन में महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाई हैं। उन्हें एक विनम्र व्यक्ति बताते हुए रावत ने कहा कि यदि ग्राम सेवक भर्ती या OMR शीट में छेड़छाड़ के आरोप सिद्ध होते हैं, तो वे उनके इस कृत्य से बेहद शर्मिंदा हैं।
राहुल गांधी के नेतृत्व में भ्रष्टाचार विरोधी अभियान का उल्लेख करते हुए रावत ने कहा कि वे नहीं चाहते कि उनके किसी सहयोगी की वजह से पार्टी की छवि धूमिल हो। इसी के तहत उन्होंने:
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उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) की कार्यकारिणी सदस्यता से इस्तीफा दिया।
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कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की स्थायी आमंत्रित सदस्यता छोड़ने का निर्णय लिया।
2. ‘राजनैतिक नरेटिव बनाने का प्रयास’
अपने बयान में हरीश रावत ने तंज कसते हुए कहा कि उत्तराखंड में चुनाव के समय जब भी उनसे तारीखों पर सवाल किया जाता था, तो वे मजाक में कहते थे कि “चुनाव तब होंगे जब CBI मेरे घर आएगी।”
उन्होंने आरोप लगाया कि इस बार केंद्रीय एजेंसियों ने सीधे उनके घर पर रेड मारने के बजाय उनके पूर्व सहयोगी को निशाना बनाया है, ताकि उनके खिलाफ एक राजनीतिक नरेटिव गढ़ा जा सके।
3. कार्यकाल का बचाव और भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता
अपनी सरकार के 3 साल के कार्यकाल का बचाव करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा:
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पारदर्शी भर्तियां: युवाओं के भविष्य के लिए अधीनस्थ सेवा चयन आयोग का गठन किया गया था, जिसके माध्यम से 42,000 से अधिक पदों पर पारदर्शी तरीके से नियुक्तियां की गईं।
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अध्यक्ष की नियुक्ति: आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष की नियुक्ति उनके पूर्व सेवा रिकॉर्ड के आधार पर हुई थी। इस संबंध में पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी (रिटायर्ड) ने भी उनसे दो बार मुलाकात की थी।
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आरएसएस पर तंज: रावत ने कहा कि भविष्य में कौन व्यक्ति क्या गलती करेगा, यह पहले से जानना संभव नहीं है; ठीक वैसे ही जैसे RSS भी यह अनुमान नहीं लगा पाया था कि उनके पर्यावरण मंच का अध्यक्ष आगे चलकर भ्रष्ट गतिविधियों में शामिल होगा।
4. जनता से क्षमा याचना और खुली जांच की चुनौती
हरीश रावत ने कहा कि यदि भर्ती प्रक्रिया या किसी निर्णय में उनसे ‘एरर ऑफ जजमेंट’ (निर्णय की चूक) हुई है, तो वे इसके लिए उत्तराखंड की जनता से सार्वजनिक रूप से क्षमा मांगते हैं।
साथ ही उन्होंने चुनौती देते हुए अपील की:
“यदि किसी के पास नियुक्तियों में मेरी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संलिप्तता का कोई भी प्रमाण हो, तो वह उसे CBI, ED या राज्य पुलिस को सौंपे। यदि मैं दोषी पाया जाता हूँ, तो कानून द्वारा दिए जाने वाले हर दंड को भुगतने के लिए तैयार हूँ।”



