
देहरादून। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने तकनीकी शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में प्रदेश में तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता और रोजगारपरकता बढ़ाने के लिए ठोस रोडमैप तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थानों और इंडस्ट्री के बीच के अंतर को कम करना समय की जरूरत है, ताकि तकनीकी संस्थानों से पढ़ाई पूरी करने वाले युवाओं को बेहतर रोजगार के अवसर मिल सकें।
सचिवालय में आयोजित समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव ने प्रदेश के तकनीकी शिक्षण संस्थानों, फैकल्टी और विद्यार्थियों की स्थिति की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर विशेष ध्यान देने के साथ ही तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए व्यापक कार्ययोजना तैयार करने को कहा।
पासआउट विद्यार्थियों को पीएम इंटर्नशिप योजना से जोड़ने के निर्देश
मुख्य सचिव ने इंजीनियरिंग और पॉलीटेक्निक कॉलेजों से पासआउट होने वाले विद्यार्थियों को पीएम इंटर्नशिप योजना का लाभ दिलाने के लिए उचित मार्गदर्शन देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस योजना के माध्यम से युवाओं को देश की शीर्ष 500 कंपनियों में वास्तविक कार्य अनुभव प्राप्त करने का अवसर मिलता है। इसके साथ ही इंटर्न को मासिक स्टाइपेंड और एकमुश्त जॉइनिंग अनुदान भी दिया जाता है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के युवाओं को विदेशों में भी रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए कॉलेजों में आयोजित होने वाले रोजगार मेलों में विदेशी नियोक्ताओं को भी आमंत्रित किया जाए।
5-6 स्थानों पर विकसित किए जाएंगे तकनीकी शिक्षा हब
मुख्य सचिव ने प्रदेश में 5-6 स्थानों को तकनीकी शिक्षा हब के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन हब में लैब, लाइब्रेरी और हॉस्टल सहित विद्यार्थियों के लिए आवश्यक सभी सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जाएं।
उन्होंने नए प्रोजेक्ट्स के लिए होलिस्टिक प्लान तैयार करने को कहा, जिसमें लैब, लाइब्रेरी, हॉस्टल और अन्य जरूरी सुविधाओं का समग्र खाका शामिल हो। इसके साथ ही पुराने इंजीनियरिंग और पॉलीटेक्निक कॉलेजों के लिए भी सैचुरेशन प्लान तैयार करने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने कहा कि अच्छे और उपयोगी प्रोजेक्ट तैयार किए जाएं। उन्होंने आश्वस्त किया कि फंडिंग की समस्या नहीं होने दी जाएगी।
तकनीकी संस्थानों को कंसल्टेंसी का केंद्र बनाने पर जोर
आनंद बर्द्धन ने कहा कि वर्तमान में विभिन्न विभागों को स्टडी और कंसल्टेंसी के लिए बाहरी एजेंसियों की सेवाएं लेनी पड़ती हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के तकनीकी शिक्षण संस्थानों को इस स्तर तक मजबूत किया जा सकता है कि वे स्वयं राज्य के विभिन्न विभागों को स्टडी और कंसल्टेंसी सेवाएं उपलब्ध करा सकें।
इसके लिए तकनीकी संस्थानों को मजबूत करने के साथ ही फैकल्टी रिक्रूटमेंट पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि मजबूत फैकल्टी और बेहतर संस्थागत क्षमता के माध्यम से तकनीकी कॉलेजों को ज्ञान, शोध और कंसल्टेंसी के महत्वपूर्ण केंद्रों के रूप में विकसित किया जा सकता है।
बैठक में ये अधिकारी रहे मौजूद
बैठक में सचिव डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा, यूटीयू की कुलपति डॉ. तृप्ता ठाकुर, पॉलीटेक्निक कॉलेजों के प्रधानाचार्य तथा संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।



