
देहरादून में उत्तराखंड कांग्रेस के चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष और पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने देश में बढ़ते एलपीजी गैस और तेल संकट को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि गैस संकट के लिए केंद्र की अदूरदर्शी नीतियां जिम्मेदार हैं और सरकार वास्तविक स्थिति स्वीकार करने के बजाय जनता को गुमराह कर रही है।
गैस बुकिंग में उपभोक्ताओं के बीच भेदभाव
डॉ. रावत ने बताया कि शहरी और ग्रामीण उपभोक्ताओं के बीच गैस बुकिंग का अंतर 25 और 45 दिन निर्धारित किया गया है, जो संकट की गंभीरता को उजागर करता है। उन्होंने मांग की कि शहरी क्षेत्रों में स्थित ग्रामीण श्रेणी की गैस एजेंसियों को तुरंत शहरी श्रेणी के समान 25 दिन की बुकिंग सुविधा दी जाए।
सिलेंडरों की कालाबाजारी और आयात पर निर्भरता
उन्होंने आरोप लगाया कि गैस संकट के कारण सिलेंडरों की कालाबाजारी और जमाखोरी के मामले बढ़ रहे हैं, लेकिन सरकार केवल बयानबाजी कर रही है। डॉ. रावत ने बताया कि भारत की गैस आयात दर 47 प्रतिशत से बढ़कर 66 प्रतिशत हो गई है और तेल आयात 83 प्रतिशत से बढ़कर 88 प्रतिशत हो गया है। उन्होंने कहा कि पहले सस्ता और जल्दी मिलने वाला तेल ईरान और खाड़ी देशों से आता था, लेकिन अब अमेरिका से आने वाले जहाजों में 55-60 दिन लगते हैं, जिससे लागत बढ़ती है और इसका बोझ जनता पर पड़ता है।
मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष में अनियमितताओं का आरोप
डॉ. रावत ने मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष के दुरुपयोग का भी आरोप लगाया। सूचना के अधिकार से प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर उन्होंने बताया कि उधम सिंह नगर और चंपावत जिलों में इस कोष का वितरण अनियमित तरीके से हुआ और भाजपा से जुड़े पदाधिकारियों एवं उनके परिजनों को बड़ी राशि दी गई। उन्होंने इस कोष की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराने की मांग की।
कांग्रेस नेताओं की मौजूदगी
इस अवसर पर कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा माहरा दसौनी, पूर्व महानगर अध्यक्ष लालचंद शर्मा, प्रदेश प्रवक्ता शीशपाल सिंह बिष्ट, वरिष्ठ नेता विनोद चौहान और श्रम प्रकोष्ठ के दिनेश कौशल भी मौजूद रहे।



