
देहरादून। राष्ट्रीय सामाजिक न्याय कृति मंच (पंजीकृत) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नानक चंद ने उत्तराखंड में अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) समुदाय की भूमि पर अवैध कब्जों, फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से जमीन हड़पने तथा प्रशासनिक स्तर पर प्रभावी कार्रवाई न होने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि इन मामलों में पीड़ित परिवारों को न्याय नहीं मिल पा रहा है। संगठन ने पूरे प्रकरण की विशेष जांच दल (एसआईटी) से जांच कराने की मांग की है।
प्रेस वार्ता में उठाए भूमि सुरक्षा के मुद्दे
उत्तरांचल प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान नानक चंद ने कहा कि आजादी के बाद केंद्र और राज्य सरकारों ने भूमिहीन एससी-एसटी परिवारों को भूमि का स्वामित्व दिलाने के उद्देश्य से कई योजनाएं और कानून लागू किए। इसके बावजूद भू-माफियाओं और प्रशासनिक मिलीभगत के कारण इन योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्र लोगों तक नहीं पहुंच सका।
कई क्षेत्रों में फर्जी दस्तावेजों से कब्जे का आरोप
उन्होंने मसूरी के बांसागाड़, भट्टा क्यारकुली, हाथीपांव, देहरादून के क्लेमेन्टाउन और विकासनगर तथा हरिद्वार के रहमतपुर सहित कई क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि दलित परिवारों की भूमि पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर अवैध कब्जे किए गए हैं। उनका कहना है कि कई मामलों में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, अनुसूचित जाति आयोग और जिला प्रशासन के निर्देशों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
पीड़ित परिवारों को सुरक्षा और न्याय दिलाने की मांग
संगठन ने टिंकू कन्नौजिया, थेचकूमल, जोकला देवी, तारा देवी और विशाल सहित कई पीड़ित परिवारों के मामलों को प्रमुखता से उठाया। मंच ने इन सभी मामलों की निष्पक्ष जांच कराने, पीड़ितों को सुरक्षा प्रदान करने तथा कब्जाई गई भूमि वापस दिलाने की मांग की।
मुख्य सचिव को भेजा गया था ज्ञापन
नानक चंद ने बताया कि 15 जुलाई 2026 को राज्य के मुख्य सचिव को भेजे गए ज्ञापन में भी प्रदेशभर में दलितों की भूमि से जुड़े मामलों की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने तथा समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की ओर से नोटिस जारी होने के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई अब तक नहीं की गई।
सरकार से विशेष अभियान चलाने की अपील
राष्ट्रीय सामाजिक न्याय कृति मंच ने राज्य सरकार से मांग की है कि अनुसूचित जाति एवं जनजाति समुदाय की भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। साथ ही, दोषियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कर भू-माफियाओं पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि पीड़ित परिवारों को शीघ्र न्याय मिल सके।



