
देवभूमि उत्तराखंड के लिए यह अत्यंत पीड़ादायक समाचार है कि बागेश्वर जनपद के कपकोट क्षेत्र के बीथी पन्याती गांव निवासी हवलदार गजेंद्र सिंह देश की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हो गए। जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में आतंकियों के खिलाफ चल रहे अभियान के दौरान उन्होंने अदम्य साहस का परिचय देते हुए मातृभूमि की रक्षा में अपने प्राण न्योछावर कर दिए।
आतंक विरोधी अभियान के दौरान शहादत
रविवार को सेना को किश्तवाड़ के सिंहपोरा क्षेत्र में आतंकियों की मौजूदगी की पुख्ता सूचना मिली थी, जिसके बाद सुरक्षा बलों द्वारा व्यापक सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया। हवलदार गजेंद्र सिंह आतंक विरोधी अभियान में जुटी विशेष बल इकाई का हिस्सा थे और ऑपरेशन त्राशी-I में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। इसी दौरान आतंकियों ने सुरक्षा बलों पर ग्रेनेड से हमला कर दिया, जिसमें कई जवान घायल हो गए। उपचार के दौरान हवलदार गजेंद्र सिंह ने अंतिम सांस ली और अमर शहीद बन गए।
घायल साथियों को बचाते हुए दिखाई वीरता
प्रत्यक्ष जानकारी के अनुसार, ग्रेनेड हमले के बाद भी हवलदार गजेंद्र सिंह ने अद्भुत साहस का परिचय देते हुए अपने घायल साथियों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। उनके इस वीरतापूर्ण कार्य के लिए व्हाइट नाइट कॉर्प्स के जीओसी सहित सेना के वरिष्ठ अधिकारियों और जवानों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। घटना के बाद इलाके में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिए गए हैं और आतंकियों की तलाश जारी है।
आज कपकोट पहुंचेगा पार्थिव शरीर
किश्तवाड़ में हुई इस मुठभेड़ में बलिदान हुए हवलदार गजेंद्र सिंह का पार्थिव शरीर मंगलवार को उनके पैतृक क्षेत्र कपकोट लाया जाएगा। पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है, वहीं देश के लिए प्राण न्योछावर करने वाले इस वीर सपूत पर लोगों को गर्व भी है। सेना के अनुसार हेलीकॉप्टर के माध्यम से पार्थिव शरीर केदारेश्वर मैदान लाया जाएगा, जिसके बाद सरयू और खीरगंगा नदी के संगम पर सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
हवलदार गजेंद्र सिंह अपने पीछे पिता धन सिंह गढ़िया, माता चंद्रा देवी, पत्नी लीला गढ़िया, दो पुत्र राहुल और धीरज तथा छोटे भाई किशोर गढ़िया को छोड़ गए हैं। उनके बच्चे देहरादून में पढ़ाई कर रहे थे। शहादत की खबर मिलते ही पत्नी लीला गढ़िया गांव पहुंचीं, जहां उनका स्वास्थ्य भी बिगड़ गया। हेलीकॉप्टर के माध्यम से गरुड़ के मेलाडुंगरी हेलीपैड तक लाया गया, जिसके बाद उन्हें कपकोट पहुंचाया गया।
शिक्षा से सेना तक का प्रेरणादायक सफर
हवलदार गजेंद्र सिंह ने प्रारंभिक शिक्षा अपने गांव से प्राप्त की थी। उन्होंने कक्षा छह से इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई राजकीय इंटर कॉलेज कपकोट से पूरी की। स्नातक के प्रथम वर्ष के दौरान वर्ष 2004 में वे भारतीय सेना में भर्ती हुए और टू-पैरा कमांडो के रूप में देश सेवा में जुट गए। उनका जीवन युवाओं के लिए साहस, समर्पण और देशभक्ति की प्रेरणा बन गया है।



