
लालकुआं। उत्तराखंड में कानून-व्यवस्था को लेकर विपक्ष ने सरकार पर कड़ा हमला बोला है। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने आरोप लगाया कि प्रदेश में जिले और पुलिस थाने “बिके हुए” हैं और थानों की खुली बोलियां लग रही हैं। उन्होंने कहा कि अपराधियों के हौसले बुलंद हैं, जबकि शासन-प्रशासन आंखें मूंदे बैठा है।
प्रदेश में बढ़ते अपराध और जंगलराज की स्थिति
पत्रकारों से बातचीत में यशपाल आर्य ने कहा कि प्रदेश में मौजूदा समय में जंगलराज और गुंडाराज की स्थिति बन चुकी है। राजधानी देहरादून समेत बड़े शहरों और कस्बों में चोरी, डकैती, लूट और हत्याओं की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। इसके बावजूद सरकार और प्रशासन गंभीरता दिखाने के बजाय मूकदर्शक बने हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस अधिकारियों और सत्ता के बीच गठजोड़ के कारण अपराधियों को संरक्षण मिल रहा है, जिससे आम जनता असुरक्षित महसूस कर रही है।
पोस्टिंग में सौदेबाजी और न्याय की चुनौती
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जब जिले और थानों में पोस्टिंग भी सौदेबाजी के आधार पर होने लगे, तो न्याय की उम्मीद कैसे की जा सकती है। उन्होंने दावा किया कि इसी वजह से प्रदेश की कानून व्यवस्था चरमरा गई है। आर्य ने कहा कि जनता अब सब देख रही है और 2027 के विधानसभा चुनाव में भ्रष्ट व्यवस्था का जवाब देने के लिए तैयार है।
किसानों की दुर्दशा और आत्महत्या की घटनाएं
यशपाल आर्य ने उधम सिंह नगर जिले के सुखवंत सिंह आत्महत्या कांड का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश का किसान आज आत्महत्या करने को मजबूर है। खेती की लागत बढ़ रही है, आमदनी घट रही है और संकट में फंसे किसानों को समय पर न्याय और राहत नहीं मिल पा रही है। इसके बावजूद सरकार संवेदनशीलता दिखाने के बजाय सत्ता के नशे में चूर है और पीड़ित परिवारों की सुध लेने को तैयार नहीं है।
जनता और महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक ओर सरकार विकास के दावे कर रही है, वहीं आम नागरिक, किसान और महिलाएं खुद को असुरक्षित महसूस कर रही हैं। उन्होंने मांग की कि सरकार तुरंत कानून व्यवस्था दुरुस्त करे, दोषी पुलिस अधिकारियों और अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे और पीड़ितों को न्याय दिलाए।
चेतावनी और भविष्य की रणनीति
यशपाल आर्य ने दो टूक कहा कि यदि हालात नहीं सुधरे तो जनता सड़कों पर उतरने को मजबूर होगी। उन्होंने भरोसा जताया कि प्रदेश की जनता लोकतांत्रिक तरीके से बदलाव लाएगी और 2027 में इस सरकार को सत्ता से बाहर कर उत्तराखंड में जवाबदेह और संवेदनशील शासन स्थापित करेगी।



