उत्तराखंडराज्य

टिहरी मेडिकल कॉलेज को जल्द मंजूरी देने की मांग, सांसद माला राज्य लक्ष्मी शाह ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

टिहरी गढ़वाल। लोकसभा सांसद माला राज्य लक्ष्मी शाह ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र भेजकर भागीरथीपुरम के समीप ईणियां में प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज की स्थापना को शीघ्र स्वीकृति प्रदान करने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि वर्षों से घोषणाएं और आश्वासन दिए जाने के बावजूद परियोजना के निर्माण संबंधी औपचारिक कार्यान्वयन आदेश अब तक जारी नहीं हुआ है, जिससे क्षेत्र के लोगों में निराशा और चिंता का माहौल है।

संघर्ष समिति ने दी आंदोलन की चेतावनी

सांसद ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि टिहरी मेडिकल कॉलेज निर्माण संयुक्त संघर्ष समिति ने 31 जुलाई को उन्हें तथा मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर अवगत कराया कि दो-दो मुख्यमंत्रियों की घोषणाओं के बावजूद मेडिकल कॉलेज का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो वह चरणबद्ध आंदोलन शुरू करने को बाध्य होगी।

टीएचडीसी के सहयोग से निर्माण की हो चुकी है घोषणा

माला राज्य लक्ष्मी शाह ने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि लगभग दो वर्ष पूर्व भारत सरकार के ऊर्जा मंत्री ने टिहरी बांध परियोजना के निकट टीएचडीसी के सहयोग से मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की घोषणा की थी। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार इस परियोजना के लिए कार्यदायी संस्था का भी चयन कर चुकी है, लेकिन अंतिम प्रशासनिक स्वीकृति अभी तक लंबित है।

पूर्व निर्धारित स्थल पर ही मिले स्वीकृति

सांसद ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि जनभावनाओं और मेडिकल कॉलेज के लिए निर्धारित मानकों को ध्यान में रखते हुए पूर्व में चयनित स्थल भागीरथीपुरम के समीप ईणियां में ही परियोजना को मंजूरी दी जाए, ताकि निर्माण कार्य शीघ्र शुरू हो सके। उन्होंने इस पत्र की प्रति टिहरी मेडिकल कॉलेज निर्माण संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक डॉ. राकेशभूषण गोदियाल को भी प्रेषित की है।

क्षेत्र के विकास के लिए मेडिकल कॉलेज को बताया महत्वपूर्ण

गौरतलब है कि स्थानीय लोग लंबे समय से टिहरी में मेडिकल कॉलेज की स्थापना की मांग कर रहे हैं। क्षेत्रवासियों का मानना है कि मेडिकल कॉलेज बनने से उच्च चिकित्सा शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा, स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित होंगे तथा क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाएं भी मजबूत होंगी। हालांकि, परियोजना की औपचारिक स्वीकृति और भूमि से संबंधित प्रशासनिक प्रक्रियाएं अभी पूरी होना बाकी हैं।

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