‘पूरी तरह से झूठ, बेबुनियाद और गुमराह करने वाली खबर’ भारत-अमेरिका ट्रेड डील में देरी की रिपोर्ट पर पीयूष गोयल

नई दिल्ली. भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है. इसकी वजह बनी समाचार एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट, जिसमें दावा किया गया कि भारत अमेरिकी दबाव में आकर कोई ऐसा व्यापार समझौता नहीं करना चाहता जिससे देश के हितों को नुकसान पहुंचे. इस रिपोर्ट के सामने आते ही केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने खुद सामने आकर स्थिति साफ कर दी. पीयूष गोयल ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच बातचीत लगातार जारी है और दोनों देश ऐसा समझौता करने की दिशा में काम कर रहे हैं, जिससे किसानों, उद्योगों, कामगारों और उपभोक्ताओं सभी को फायदा हो. उन्होंने यह भी बताया कि जून में जब अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जेम्स ग्रीयर (James Greer) दिल्ली आए थे, तब उनकी बैठक काफी सकारात्मक रही थी. बकौल पीयूष गोयल, रॉयटर्स की खबर गलत, बेबुनियाद और भ्रामक है.
रॉयटर्स की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया था कि भारत जल्दबाजी में कोई अंतरिम ट्रेड डील नहीं करना चाहता. रिपोर्ट के मुताबिक, भारत चाहता है कि अमेरिका उसे चीन जैसे देशों के मुकाबले टैरिफ में बेहतर रियायत दे. साथ ही यह भरोसा भी दे कि भविष्य में भारत पर कोई नया टैक्स या अतिरिक्त शुल्क नहीं लगाया जाएगा. लेकिन इन मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी. रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि भारत कृषि क्षेत्र पर कोई समझौता करने के लिए तैयार नहीं है. सरकार का मानना है कि किसानों और छोटे कारोबारियों के हितों से समझौता नहीं किया जा सकता, इसलिए किसी भी डील से पहले इन मुद्दों को प्राथमिकता दी जाएगी.
सर्जियो गौर ने भी दिया बयान
मामला इतना बढ़ गया कि भारत में यूएस के राजदूत तक को इस खबर का खंडन करना पड़ा. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स डॉट कॉम पर लिखा, “गलत खबर! किसी ने कुछ नहीं ठुकराया. दोनों ही पक्षों ने ट्रेड डील को अंतिम रूप दिए जाने को लेकर प्रतिबद्धता जताई. हम लगातार बात कर रहे हैं. रॉयटर्स- आपसे बेहतर की उम्मीद है.”
अमेरिका की तरफ से क्या है दबाव?
रिपोर्ट के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) प्रशासन भारत समेत कई देशों पर नए टैरिफ लगाने की तैयारी कर रहा है. फिलहाल भारतीय सामानों पर करीब 10 फीसदी शुल्क लगता है, लेकिन कुछ मामलों में इसे बढ़ाकर 12.5 फीसदी तक किया जा सकता है. अमेरिका का कहना है कि अगर भारत को ज्यादा रियायत चाहिए तो उसे भी अमेरिकी उत्पादों के लिए अपने बाजार में ज्यादा छूट देनी होगी.
भारत क्यों नहीं दिखा रहा जल्दबाजी?
रिपोर्ट के अनुसार, भारत की स्थिति पहले से ज्यादा मजबूत है. हाल के महीनों में भारत का निर्यात बढ़ा है. ब्रिटेन के साथ मुक्त व्यापार समझौता लागू होने जा रहा है और यूरोपीय संघ के साथ भी बातचीत आगे बढ़ रही है. ऐसे में भारत के पास दूसरे बाजारों के विकल्प भी मौजूद हैं. इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और मजबूत आर्थिक वृद्धि के अनुमान ने भी भारत की सौदेबाजी की ताकत बढ़ाई है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि घरेलू राजनीतिक परिस्थितियां भी सरकार को जल्दबाजी में कोई फैसला लेने से रोक रही हैं.
वाणिज्य सचिव ने क्या कहा?
इस बीच वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने भी साफ किया कि भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर बातचीत प्रगति पर है. उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच समझौते का फ्रेमवर्क तैयार हो चुका है और अब बाकी मुद्दों पर चर्चा जारी है. यानी फिलहाल भारत और अमेरिका के बीच बातचीत रुकी नहीं है. कुछ अहम मुद्दों पर दोनों देशों के बीच मतभेद जरूर हैं, लेकिन सरकार का कहना है कि बातचीत आगे बढ़ रही है. ऐसे में भारत नहीं चाहता कि किसी भी तरह की भ्रामक खबरों का असर दोनों देशों के प्रतिनिधियों पर पड़े और बातचीत में किसी तरह की बाधा आए.


