एक नजर में जानें ईरान पर अमेरिका-इजराइल के एक महीने के युद्ध की कीमत

हैदराबाद: ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमलों ने न केवल खाड़ी क्षेत्र बल्कि पूरी दुनिया को प्रभावित किया है। इस संघर्ष ने जान-माल की भारी क्षति के साथ-साथ वैश्विक ईंधन संकट को भी जन्म दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके कारण लाखों लोग गरीबी की ओर धकेले जा सकते हैं। 29 मार्च को इस युद्ध को एक महीना पूरा हो गया, और अब इसके व्यापक प्रभाव साफ नजर आने लगे हैं।
युद्ध की इंसानी कीमत
बढ़ते मृतकों और घायलों की संख्या
ईरान में अमेरिकी-इजराइली हमलों के कारण 1,500 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि लगभग 24,800 लोग घायल हुए हैं। मृतकों में बड़ी संख्या महिलाओं और बच्चों की है, जो इस युद्ध की भयावहता को दर्शाता है।
अलग-अलग देशों पर असर
ईरान के जवाबी हमलों में 19 इजराइली नागरिकों की मौत हुई और हजारों लोग घायल हुए। इसके अलावा 13 अमेरिकी कर्मियों ने भी अपनी जान गंवाई, जबकि 200 घायल हुए। खाड़ी देशों में भी 25 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। वहीं लेबनान में यह आंकड़ा 1,094 मृतकों और 3,119 घायलों तक पहुंच गया है।
बच्चों और आम नागरिकों पर हमला
28 फरवरी 2026 को ईरान के मिनाब शहर के एक गर्ल्स स्कूल पर हुए मिसाइल हमले में लगभग 165 बच्चों की जान चली गई, जिनमें अधिकांश 7 से 12 वर्ष की बच्चियां थीं। यह घटना युद्ध के सबसे दर्दनाक पहलुओं में से एक बन गई है।
विस्थापन और संपत्ति का नुकसान
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, इस युद्ध के चलते ईरान में 3.2 मिलियन लोग बेघर हो चुके हैं। इसके अलावा 85,000 से अधिक घरों, स्कूलों और अस्पतालों को भारी नुकसान पहुंचा है।
आर्थिक लागत और वैश्विक असर
युद्ध पर भारी खर्च
सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के मुताबिक, युद्ध के शुरुआती 100 घंटों में ही लगभग 3.7 बिलियन डॉलर खर्च हो गए। कुल मिलाकर यह संघर्ष अमेरिकी करदाताओं पर 25 से 30 बिलियन डॉलर का बोझ डाल चुका है।
इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा क्षेत्र को नुकसान
मिडिल ईस्ट के नौ देशों में कम से कम 40 ऊर्जा संपत्तियां गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुई हैं। इसके अलावा गल्फ क्षेत्र की 30 से 40 प्रतिशत रिफाइनिंग क्षमता प्रभावित हुई है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति में रोजाना 11 मिलियन बैरल की कमी आ गई है।
तेल और बाजार पर प्रभाव
ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है, जो पहले लगभग 65 डॉलर थी। इससे पूरी दुनिया में महंगाई बढ़ने का खतरा मंडरा रहा है।
पर्यटन और विमानन उद्योग पर असर
युद्ध के पहले 24 घंटों में ही 3,400 से अधिक फ्लाइट्स रद्द कर दी गईं। दुबई में पहले हफ्ते में 80,000 से ज्यादा होटल बुकिंग्स कैंसिल हुईं। पर्यटन क्षेत्र को शुरुआती 20 दिनों में ही 12 बिलियन डॉलर से अधिक का नुकसान हुआ है।
भविष्य के आर्थिक खतरे
यदि यह संघर्ष लंबा चलता है, तो 27 प्रतिशत तक पर्यटकों की संख्या में गिरावट आ सकती है, जिससे 56 बिलियन डॉलर तक का नुकसान होने की आशंका है।
पर्यावरण पर युद्ध का दुष्प्रभाव
बढ़ता कार्बन उत्सर्जन
युद्ध के पहले 14 दिनों में ही 5 मिलियन टन से अधिक कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन हुआ है, जो पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा है।
उत्सर्जन के प्रमुख स्रोत
इस दौरान घरों और इंफ्रास्ट्रक्चर के नुकसान से 2.4 मिलियन टन CO₂e उत्सर्जन हुआ। सैन्य अभियानों में ईंधन के उपयोग से 529,000 टन, जबकि तेल के जलने से 1.88 मिलियन टन उत्सर्जन हुआ। इसके अलावा सैन्य उपकरणों के नुकसान और मिसाइल-ड्रोन हमलों से भी भारी मात्रा में प्रदूषण फैला।
निष्कर्ष
ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच चल रहा यह युद्ध केवल एक क्षेत्रीय संघर्ष नहीं रहा, बल्कि यह वैश्विक संकट में बदल चुका है। इंसानी नुकसान, आर्थिक दबाव और पर्यावरणीय क्षति—तीनों स्तरों पर इसके गंभीर परिणाम सामने आ रहे हैं। यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया, तो इसके दूरगामी प्रभाव पूरी दुनिया को लंबे समय तक झेलने पड़ सकते हैं।


