
नई दिल्ली। केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव ने कहा कि देश के अंतिम गांव और अंतिम व्यक्ति तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए स्वास्थ्य और कल्याण इकोसिस्टम को मजबूत करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इस दिशा में होम्योपैथी एक प्रभावी और किफायती चिकित्सा पद्धति के रूप में उभर रही है, जो ग्रामीण, जनजातीय और स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
होम्योपैथी: सतत और समग्र स्वास्थ्य मॉडल
विश्व होम्योपैथी दिवस पर मंत्री ने बताया कि भारत में होम्योपैथी केवल व्यक्तिगत उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समग्र और सतत स्वास्थ्य मॉडल विकसित करने में भी योगदान दे रही है। इस वर्ष विश्व होम्योपैथी दिवस की थीम “सतत स्वास्थ्य के लिए होम्योपैथी” रखी गई है।
होम्योपैथी का इतिहास और सिद्धांत
जाधव ने बताया कि होम्योपैथी की स्थापना 18वीं शताब्दी में सैमुअल हैनिमैन द्वारा की गई थी। यह पद्धति “सिमिलिया सिमिलिबस क्यूरेंचर” अर्थात “समान से समान का उपचार” के सिद्धांत पर आधारित है। भारत में यह प्रणाली लंबे समय से रोगी-केंद्रित और समग्र उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है।
शिक्षा और चिकित्सा नेटवर्क
मंत्री ने कहा कि देश में 290 से अधिक होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज और अस्पताल हैं और चिकित्सकों का व्यापक नेटवर्क उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि दूरदराज के इलाकों में एक अकेला चिकित्सक भी सामुदायिक स्वास्थ्य में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।
राष्ट्रीय आयुष मिशन और स्वास्थ्य सेवाएं
जाधव ने बताया कि राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत देशभर में 12,500 से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर (आयुष) स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों में होम्योपैथी सहित विभिन्न आयुष पद्धतियों के माध्यम से प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जा रही हैं।
होम्योपैथी और गैर-संक्रामक रोग
मंत्री ने कहा कि होम्योपैथी मधुमेह, हृदय रोग और अन्य गैर-संक्रामक बीमारियों के प्रबंधन में सहायक सिद्ध हो रही है। केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद (सीसीआरएच) द्वारा इसे कई राष्ट्रीय कार्यक्रमों में शामिल किया गया है।
किफायती और टिकाऊ स्वास्थ्य पद्धति
जाधव ने कहा कि होम्योपैथिक दवाइयां किफायती, संग्रहण में आसान और पर्यावरण पर न्यूनतम प्रभाव डालती हैं। यही कारण है कि यह प्रणाली सतत और समावेशी स्वास्थ्य व्यवस्था के निर्माण में महत्वपूर्ण है।
विकसित भारत और हर नागरिक तक स्वास्थ्य सेवाएं
मंत्री ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए यह सुनिश्चित करना होगा कि गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं भौगोलिक और सामाजिक-आर्थिक बाधाओं से परे हर नागरिक तक पहुंचें। उन्होंने जोर देकर कहा कि होम्योपैथी सामुदायिक जुड़ाव और टिकाऊ दृष्टिकोण के साथ इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।



