ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर मचाई सनसनी, खुद को बताया वेनेजुएला का ‘एक्टिंग राष्ट्रपति’

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दुनिया को चौंका दिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर अपनी एक तस्वीर साझा करते हुए ट्रंप ने खुद को वेनेजुएला का कार्यवाहक राष्ट्रपति (Acting President of Venezuela) घोषित कर दिया है। ट्रंप ने यह कदम तब उठाया है जब हाल ही में अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को उनके देश से पकड़कर न्यूयॉर्क की जेल में डाल दिया है।
ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट कर मचाई सनसनी
ट्रंप ने रविवार, 11 जनवरी को एक तस्वीर पोस्ट की, जिसमें उन्हें वेनेजुएला का मौजूदा कार्यवाहक राष्ट्रपति दिखाया गया है। पोस्ट में उनके कार्यकाल की शुरुआत जनवरी 2026 बताई गई है। ट्रंप ने कहा, ‘हम वेनेजुएला को तब तक चलाएंगे जब तक कि वहां सत्ता का सुरक्षित और उचित हस्तांतरण नहीं हो जाता। हम कोई जोखिम नहीं ले सकते।’
वेनेजुएला के तेल पर अमेरिकी नियंत्रण
ट्रंप ने वेनेजुएला के विशाल तेल राजस्व को सुरक्षित करने के लिए एक ‘राष्ट्रीय आपातकाल’ घोषित करते हुए कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए है। अमेरिकी बैंकों में जमा वेनेजुएला के तेल बिक्री का पैसा अब ट्रंप प्रशासन के नियंत्रण में होगा। इसे लेनदारों या अन्य देशों को जब्त करने से रोक दिया गया है। ट्रंप ने बताया कि वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने अमेरिका को 5 करोड़ बैरल तेल देने का प्रस्ताव दिया है, जिसकी कीमत लगभग $4.2 बिलियन (करीब 35,000 करोड़ रुपये) है। यह तेल अमेरिका के लिए रवाना हो चुका है।
‘ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व’ के तहत हुई थी मादुरो की गिरफ्तारी
वेनेजुएला में इस उथल-पुथल की शुरुआत 3 जनवरी 2026 को हुई। अमेरिकी सेना ने ‘ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व’ के तहत कराकस में छापा मारा और निकोलस मादुरो व उनकी पत्नी को गिरफ्तार कर लिया। मादुरो फिलहाल न्यूयॉर्क में हैं, जहां उन पर मादक पदार्थों की तस्करी और आतंकवाद की साजिश रचने के आरोप में मुकदमा चल रहा है। मादुरो की गिरफ्तारी के बाद, वहां की पूर्व उपाध्यक्ष डेल्सी रोड्रिगेज ने अंतरिम राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली है और वे अमेरिका के साथ सहयोग कर रही हैं।
क्या अब अमेरिका की कॉलोनी बन गया है वेनेजुएला?
ट्रंप के इस कदम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानूनी बहस छेड़ दी है। जहां ट्रंप इसे वेनेजुएला के लोगों की ‘शांति और समृद्धि’ के लिए उठाया गया कदम बता रहे हैं, वहीं आलोचक इसे एक संप्रभु राष्ट्र की संप्रभुता का उल्लंघन मान रहे हैं। फिलहाल, वेनेजुएला का प्रशासन और उसका तेल, दोनों ही वाशिंगटन के सीधे नियंत्रण में है।


