
देहरादून: प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और एआईसीसी सदस्य सूर्यकांत धस्माना ने देश में बढ़ती महंगाई और यूपीआई (UPI) लेनदेन पर प्रस्तावित शुल्क को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि आम जनता पहले से ही महंगाई की मार झेल रही है और अब बड़े व्यापारिक यूपीआई भुगतान पर शुल्क लगाने का निर्णय लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ डालेगा।
आंकड़ों का हवाला: आसमान छू रही है थोक और खुदरा महंगाई
धस्माना ने वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों का जिक्र करते हुए कहा कि देश में महंगाई की स्थिति चिंताजनक है:
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थोक महंगाई (WPI): अगस्त महीने में थोक महंगाई दर 9.92% तक पहुँच गई है। इसमें ईंधन और बिजली क्षेत्र की थोक महंगाई 22.93% तथा विनिर्मित (manufactured) उत्पादों की महंगाई 8.37% दर्ज की गई है।
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खुदरा महंगाई (CPI): अगस्त में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.82% हो गई, जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों की खुदरा महंगाई 5.23% रही।
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खाद्य महंगाई: खाद्य पदार्थों की महंगाई दर 5.95% तक पहुँच गई है।
उन्होंने कहा कि दूध, चीनी, रसोई गैस, पेट्रोल-डीजल, दालें और खाद्य तेल जैसी अत्यंत आवश्यक वस्तुओं के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, जिससे आम परिवारों का घरेलू बजट पूरी तरह बिगड़ चुका है।
15 अक्टूबर से बड़े व्यापारिक यूपीआई लेनदेन पर शुल्क का विरोध
सूर्यकांत धस्माना ने डिजिटल लेनदेन पर प्रस्तावित शुल्क का कड़ा विरोध किया।
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प्रस्तावित शुल्क व्यवस्था: 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से अधिक के व्यक्ति-से-व्यापारी (Person to Merchant – P2M) यूपीआई भुगतान पर 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने का प्रस्ताव है, जो अधिकतम ₹300 तक हो सकता है।
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व्यापारियों पर असर: यद्यपि यह शुल्क सीधे ग्राहकों के बजाय व्यापारियों पर लगाया जाएगा और व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) लेनदेन पूरी तरह से निशुल्क रहेंगे, फिर भी धस्माना ने सवाल उठाया कि छोटे कारोबारियों के लिए इसकी व्यावहारिक स्थिति काफी मुश्किल भरी होगी। अंततः इसका अप्रत्यक्ष असर आम ग्राहकों और छोटे व्यापारियों पर ही पड़ेगा।
कांग्रेस की माँग: महंगाई पर लगे अंकुश, डिजिटल भुगतान रहे निशुल्क
धस्माना ने सरकार से माँग की कि:
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अति-आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों पर तुरंत नियंत्रण लगाया जाए।
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डिजिटल भुगतान व्यवस्था को आम नागरिकों और छोटे व्यापारियों के लिए सरल, सुलभ और लागत-मुक्त बनाए रखा जाए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी महंगाई और आम जनता के आर्थिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को हर मंच पर प्रमुखता से उठाती रहेगी।



