
शिमला। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष ने अपने शिमला प्रवास के दौरान निर्माणाधीन चार-लेन शिमला बाईपास परियोजना के पैकेज-1 (कैथलीघाट-शकराल खंड) का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने परियोजना की वर्तमान स्थिति, निर्माण गतिविधियों और अब तक प्राप्त महत्वपूर्ण उपलब्धियों की विस्तार से समीक्षा की।
चुनौतीपूर्ण पहाड़ी क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा निर्माण कार्य
देश की प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण कंपनियों में शामिल एसपीएस कंस्ट्रक्शंस इस महत्वाकांक्षी परियोजना का निर्माण कार्य संभाल रही है। हिमालयी क्षेत्र की जटिल भौगोलिक परिस्थितियों के बीच कंपनी आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों की मदद से सड़क और सुरंग निर्माण के कार्यों को सफलतापूर्वक आगे बढ़ा रही है। परियोजना के अंतर्गत विभिन्न सुरंगों में सफल ब्रेकथ्रू समेत कई अहम निर्माण चरण पूरे किए जा चुके हैं।
गुणवत्तापूर्ण निर्माण पर विशेष ध्यान
एसपीएस कंस्ट्रक्शंस के निदेशक रोहित सिंगला ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के लिए बेहद महत्वपूर्ण इस परियोजना का हिस्सा बनना कंपनी के लिए गर्व की बात है। उन्होंने बताया कि पर्वतीय क्षेत्रों में अवसंरचना विकास कार्य सामान्य परियोजनाओं की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण होते हैं और इसके लिए उच्च तकनीकी दक्षता, सटीक योजना तथा अनुभवी कार्यबल की आवश्यकता होती है।
उन्होंने कहा कि परियोजना के विभिन्न हिस्सों में हुई उल्लेखनीय प्रगति टीम की मेहनत, समर्पण और गुणवत्ता के प्रति प्रतिबद्धता का प्रमाण है। कंपनी निर्माण के प्रत्येक चरण में सुरक्षा मानकों और गुणवत्ता मानकों का विशेष ध्यान रख रही है।
तय समय सीमा में परियोजना पूरी करने का लक्ष्य
रोहित सिंगला ने बताया कि कंपनी निर्धारित समयसीमा के भीतर परियोजना को पूरा करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। निर्माण कार्यों में गुणवत्ता, सुरक्षा और समयबद्ध निष्पादन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है ताकि परियोजना का लाभ जल्द से जल्द लोगों तक पहुंच सके।
शिमला और आसपास के क्षेत्रों को मिलेगा बड़ा लाभ
चार-लेन शिमला बाईपास परियोजना के पूर्ण होने के बाद राजधानी शिमला और उसके आसपास के क्षेत्रों में यातायात दबाव में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है। इससे यात्रियों को तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक आवागमन की सुविधा मिलेगी। साथ ही प्रदेश में क्षेत्रीय संपर्क व्यवस्था को मजबूती मिलेगी और पर्यटन, व्यापार तथा स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति प्राप्त होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना न केवल स्थानीय निवासियों बल्कि पर्यटकों और व्यावसायिक वाहनों के लिए भी यात्रा को अधिक सुगम बनाएगी, जिससे हिमाचल प्रदेश के समग्र विकास को बल मिलेगा।



