
देहरादून। शनिवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भारतीय संविधान के शिल्पकार और भारत रत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर की पुण्यतिथि पर मुख्यमंत्री आवास में उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा साहेब ने जीवनभर शिक्षा, समानता और स्वाभिमान का मार्ग दिखाया और समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय पहुँचाने की प्रेरणा दी। उन्होंने बताया कि बाबा साहेब के विचारों को आधार मानकर राज्य सरकार समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू कर सामाजिक समरसता और समान अधिकारों की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठा चुकी है।
पर्वतीय क्षेत्रों में हवाई कनेक्टिविटी को नई उड़ान
मुख्यमंत्री धामी के प्रयासों से उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में हवाई संपर्क विस्तार की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है। शनिवार को जॉलीग्रांट एयरपोर्ट से देहरादून, नई टिहरी, श्रीनगर और गौचर को जोड़ने वाली नई हेली सेवा की शुरुआत हुई। इससे पहले कुमाऊँ क्षेत्र के नैनीताल, बागेश्वर, हल्द्वानी, चंपावत, पिथौरागढ़, मुनस्यारी और अल्मोड़ा को भी हवाई सेवा से जोड़ा जा चुका है।
उड़ान योजना के तहत किफायती हेली सेवा
रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम ‘उड़ान’ के अंतर्गत शुरू की गई यह 6-सीटर हेली सेवा प्रतिदिन दो उड़ानें संचालित करेगी। पहली उड़ान सुबह 10:15 बजे जॉलीग्रांट से टिहरी, फिर श्रीनगर और गौचर होते हुए 11 बजे देहरादून लौटेगी। दूसरी उड़ान दोपहर 2:30 बजे इसी मार्ग पर चलेगी। किराया भी आम लोगों के लिए किफायती रखा गया है—देहरादून से टिहरी तक 2000 रुपये, टिहरी से श्रीनगर तक 1000 रुपये और श्रीनगर से गौचर तक 1000 रुपये प्रति यात्री।
यात्रियों का उत्साह और अपेक्षाएँ
पहले दिन की उड़ान में यात्रियों ने नई हेली सेवा को लेकर उत्साह प्रकट किया। देहरादून से गोपेश्वर की ओर यात्रा कर रहे विकास चौहान ने बताया कि यह सेवा पर्वतीय क्षेत्रों को तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक पहुंच उपलब्ध कराने की दिशा में मुख्यमंत्री धामी का सराहनीय कदम है। उनके अनुसार, यह सेवा न केवल यात्रियों का समय बचाएगी, बल्कि आपातकालीन परिस्थितियों में भी बड़ी राहत साबित होगी।
पर्यटन, व्यापार और आपदा प्रबंधन को मिलेगा बल
सरकार का मानना है कि यह हेली सेवा पहाड़ों में रहने वाले लोगों के जीवन को आसान बनाएगी और क्षेत्रीय विकास को नई गति देगी। इसके माध्यम से पर्यटन, व्यापार, रोजगार और आपदा प्रबंधन को भी सशक्त आधार मिलेगा। पहाड़ की कठिनाइयों को कम कर लोगों को बेहतर सुविधाएँ उपलब्ध कराने की दिशा में इसे एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।



