
देहरादून में स्थित प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय एक बड़े विवाद का केंद्र बन गया है। प्रारंभिक शिक्षा निदेशक ने विधायक उमेश शर्मा काऊ और उनके समर्थकों पर कार्यालय में जबरन प्रवेश कर अभद्रता, मारपीट, सरकारी दस्तावेजों को नुकसान पहुंचाने और जान से मारने की धमकी देने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। इस मामले को लेकर शिक्षा विभाग में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है।
घटना का पूरा विवरण: कब और कैसे बढ़ा विवाद
निदेशक द्वारा थाना रायपुर में दी गई तहरीर के अनुसार, शनिवार 21 फरवरी 2026 को दोपहर लगभग 12:10 बजे विधायक अपने समर्थकों के साथ ननूरखेड़ा स्थित निदेशालय परिसर पहुंचे। उस समय निदेशक अपने कक्ष में विभागीय अधिकारियों के साथ शासकीय कार्यों पर चर्चा कर रहे थे। आरोप है कि विधायक कक्ष में प्रवेश करते ही कर्मचारियों के साथ तीखी बहस करने लगे और उन्हें बाहर जाने के लिए कहा गया। उनके साथ आए लोगों ने भी कर्मचारियों को कथित रूप से धमकाया कि बाहर न निकलने पर गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
दरवाजा बंद कर बनाया दबाव, मोबाइल छीनने का प्रयास
तहरीर में कहा गया है कि कर्मचारियों के बाहर जाने के बाद कक्ष का दरवाजा अंदर से बंद कर दिया गया। इस दौरान निदेशक से मोबाइल फोन छीनने की कोशिश की गई और एक राजकीय प्राथमिक विद्यालय से संबंधित मामले को तत्काल निपटाने का दबाव बनाया गया। निदेशक ने बताया कि संबंधित प्रकरण शासन स्तर पर लंबित है, जिसे तुरंत निस्तारित करना संभव नहीं है। इस पर कथित रूप से धक्का-मुक्की और जान से मारने की धमकी दी गई।
112 पर कॉल के बाद भी नहीं थमा हंगामा
घटना की आवाज बाहर तक पहुंचने पर कर्मचारियों ने हस्तक्षेप करने का प्रयास किया और दोपहर 12:37 बजे आपातकालीन सेवा 112 पर कॉल कर पुलिस को सूचना दी। आरोप है कि दरवाजा खुलने के बाद भी स्थिति सामान्य नहीं हुई और विधायक तथा उनके समर्थक आक्रामक रुख में रहे। बीच-बचाव के लिए आए कर्मचारियों, जिनमें महिला कर्मी भी शामिल थीं, के साथ कथित रूप से अभद्र व्यवहार किया गया।
दस्तावेज फाड़े गए, कार्यालय संपत्ति को नुकसान
निदेशक का कहना है कि हमलावरों ने कार्यालय की महत्वपूर्ण पत्रावलियां फाड़ दीं और कुछ दस्तावेज अपने साथ ले गए। फर्नीचर को उठाकर फेंकने, कार्यालय के बाहर लगे बोर्ड और गमलों को नुकसान पहुंचाने तथा नारेबाजी करने के भी आरोप लगाए गए हैं। निदेशक ने अपनी आंख और चेहरे पर गंभीर चोट लगने का उल्लेख करते हुए चिकित्सालय में उपचार कराने की जानकारी दी है।
जान का खतरा होने की आशंका, सख्त कार्रवाई की मांग
तहरीर में निदेशक ने आशंका जताई है कि यदि कर्मचारियों ने समय रहते हस्तक्षेप न किया होता तो उनकी जान को गंभीर खतरा हो सकता था। उन्होंने संबंधित पक्षों के खिलाफ उचित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर कठोर कानूनी कार्रवाई करने और अपनी तथा कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
घटना के बाद शिक्षा विभाग के कर्मचारियों में रोष व्याप्त है और वे दोषियों के खिलाफ त्वरित एवं कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।



