सितारगंज स्थित राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में एक दिवसीय आईपीआर जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों, शोधकर्ताओं और नवाचारकर्ताओं को बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) तथा प्राविजनल पेटेंट फाइलिंग की व्यावहारिक और उपयोगी जानकारी प्रदान करना रहा।
प्राचार्य की अध्यक्षता में हुआ कार्यक्रम
बुधवार को आयोजित कार्यशाला की अध्यक्षता महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो. रेनू रानी बंसल ने की। “प्रोविजनल पेटेंट फाइलिंग: स्टेप बाय स्टेप गाइड” विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि आज के समय में नवाचारों की सुरक्षा के लिए आईपीआर का ज्ञान अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि शिक्षक और शोधकर्ता अपने शैक्षणिक एवं तकनीकी नवाचारों को पेटेंट के माध्यम से संरक्षित कर सकते हैं, जिससे उनके कार्य को कानूनी मान्यता और सुरक्षा मिलती है।
मुख्य वक्ता ने समझाई पेटेंट फाइलिंग प्रक्रिया
कार्यशाला में उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, देहरादून के पेटेंट इन्फॉर्मेशन सेंटर से जुड़े हिमांशु गोयल मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने शोधकर्ताओं को प्राविजनल पेटेंट फाइलिंग की पूरी प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से समझाया और नवाचार संरक्षण से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।
आईपीआर जागरूकता और पेटेंट ड्राफ्टिंग पर चर्चा
हिमांशु गोयल ने आईपीआर जागरूकता, पेटेंट ड्राफ्टिंग की मूलभूत जानकारियां और उससे जुड़े महत्वपूर्ण बिंदुओं को अनुभव-आधारित उदाहरणों के माध्यम से सरल भाषा में प्रस्तुत किया। इससे प्रतिभागियों को पेटेंट प्रक्रिया को समझने में काफी सहायता मिली।
शिक्षक एवं शोधकर्ताओं की सक्रिय सहभागिता
कार्यक्रम का संचालन डॉ. सुधा पाल ने किया। इस अवसर पर डॉ. एमसी आर्य, डॉ. जगदीश प्रसाद, डॉ. शोभा बजैठा, डॉ. गरिमा जोशी, डॉ. संजय टम्टा, डॉ. गीतांजलि मिश्रा, डॉ. कमला उपाध्याय सहित महाविद्यालय के अन्य शिक्षक एवं शोधकर्ता उपस्थित रहे और कार्यशाला को ज्ञानवर्धक बताया।



