
नई दिल्ली। भारत का वस्त्र उद्योग अब टिकाऊ विकास और सर्कुलर इकोनॉमी की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। यह क्षेत्र न केवल देश की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है, बल्कि बड़े स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने वाला प्रमुख उद्योग भी है।
भारत का टेक्सटाइल सेक्टर सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में लगभग 2 प्रतिशत का योगदान देता है और 4.5 करोड़ से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार प्रदान करता है।
टेक्सटाइल वेस्ट के पुनर्चक्रण पर बढ़ रहा जोर
भारत में हर वर्ष लगभग 78 लाख टन वस्त्र अपशिष्ट (टेक्सटाइल वेस्ट) उत्पन्न होता है। इसमें से 70 प्रतिशत से अधिक अपशिष्ट का उपयोग पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग), पुन: उपयोग (रीयूज) और अपसाइक्लिंग जैसी प्रक्रियाओं के माध्यम से किया जा रहा है।
सरकार के अनुसार, वस्त्र क्षेत्र से जुड़े सर्कुलर नेटवर्क वर्तमान में 40 से 45 लाख लोगों की आजीविका का आधार बने हुए हैं।
टिकाऊ फाइबर उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए योजनाएं
टिकाऊ फाइबर के उत्पादन और पर्यावरण अनुकूल वस्त्र निर्माण को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इनमें राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (NPOP), जूट-आईकेयर (Jute-ICARE) और न्यू एज फाइबर मिशन प्रमुख हैं।
इन पहलों का उद्देश्य प्राकृतिक और पर्यावरण अनुकूल फाइबर के उपयोग को बढ़ावा देना तथा वस्त्र उद्योग को अधिक टिकाऊ बनाना है।
स्वच्छ उत्पादन प्रणाली को प्रोत्साहित कर रही सरकारी पहल
स्वच्छ और सर्कुलर उत्पादन व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए पीएम मित्र (PM MITRA), एमएसई-गिफ्ट (MSE-GIFT) और एमएसई-स्पाइस (MSE-SPICE) जैसी योजनाओं पर भी काम किया जा रहा है।
इसके अलावा ईको-मार्क, गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) के माध्यम से खरीद प्रक्रिया और ट्रेसबिलिटी व्यवस्था से टिकाऊ उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने में सहायता मिल रही है।
टेक्सटाइल रीसाइक्लिंग उद्योग में रोजगार की नई संभावनाएं
सरकार का अनुमान है कि भारत का टेक्सटाइल रीसाइक्लिंग उद्योग आने वाले समय में लगभग 3.5 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच सकता है। इससे करीब एक लाख नए हरित (ग्रीन) रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है।
टिकाऊ उत्पादन, अपशिष्ट प्रबंधन और पर्यावरण अनुकूल तकनीकों के बढ़ते इस्तेमाल से भारत का वस्त्र उद्योग वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।



