
देहरादून। जंग (Corrosion) की समस्या भारतीय अर्थव्यवस्था पर बड़ा वित्तीय बोझ डाल रही है। नोमुरा की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, जंग के कारण भारत को हर वर्ष करीब ₹14.15 लाख करोड़ का नुकसान हो रहा है, जो देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग 4.3 प्रतिशत है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि बुनियादी ढांचे और औद्योगिक परिसंपत्तियों के क्षरण के कारण रखरखाव खर्च बढ़ रहा है, उत्पादकता प्रभावित हो रही है और परिसंपत्तियों की कार्य अवधि कम हो रही है।
राष्ट्रीय राजमार्ग, रेलवे और बिजली क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित
नोमुरा की रिपोर्ट के अनुसार, जंग का सबसे अधिक असर राष्ट्रीय राजमार्गों, पुलों, रेलवे नेटवर्क, बिजली अवसंरचना, दूरसंचार प्रणालियों, भवनों और औद्योगिक इकाइयों पर पड़ रहा है।
जंग के कारण समय से पहले मरम्मत और उपकरणों के प्रतिस्थापन की आवश्यकता बढ़ जाती है, जिससे सरकार और उद्योगों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ता है।
बिजली क्षेत्र में सबसे ज्यादा आर्थिक नुकसान
रिपोर्ट के मुताबिक, विभिन्न क्षेत्रों में बिजली क्षेत्र जंग से सबसे अधिक प्रभावित है। इस क्षेत्र में होने वाला आर्थिक नुकसान क्षेत्रीय GDP का लगभग 10.1 प्रतिशत आंका गया है।
इसके बाद दूरसंचार क्षेत्र में 3.8 प्रतिशत, ऑटोमोबाइल क्षेत्र में 3.0 प्रतिशत और रेलवे क्षेत्र में 2.8 प्रतिशत तक नुकसान का अनुमान लगाया गया है।
भारत की जलवायु परिस्थितियां बढ़ा रही हैं जंग की समस्या
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की लंबी समुद्री तटरेखा, अधिक आर्द्रता, औद्योगिक प्रदूषण और अलग-अलग जलवायु परिस्थितियां जंग की समस्या को और गंभीर बनाती हैं।
इन्हीं कारणों से भारत में जंग से होने वाला आर्थिक नुकसान कई विकसित देशों की तुलना में अधिक बताया गया है।
जंग नियंत्रण से GDP वृद्धि को मिल सकता है बढ़ावा
अध्ययन में बताया गया है कि यदि भारत वैश्विक मानकों के अनुरूप जंग-रोधी तकनीकों और प्रभावी प्रबंधन उपायों को अपनाता है, तो GDP में 1.5 प्रतिशत तक की अतिरिक्त वृद्धि की संभावना बन सकती है।
इससे न केवल बुनियादी ढांचे की मजबूती बढ़ेगी, बल्कि परिसंपत्तियों का जीवनकाल भी लंबा होगा और रखरखाव व प्रतिस्थापन पर होने वाले खर्च में कमी आएगी।
शुरुआती योजना में शामिल हो जंग प्रबंधन
रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि किसी भी परियोजना की शुरुआत से ही जंग प्रबंधन को योजना का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
इसके लिए बेहतर इंजीनियरिंग मानकों, नियमित निरीक्षण, प्रभावी निगरानी व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमाणित जंग-रोधी तकनीकों के व्यापक उपयोग पर जोर दिया गया है।
टिकाऊ निर्माण तकनीकों से कम हो सकता है आर्थिक नुकसान
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत तेजी से बुनियादी ढांचे का विस्तार कर रहा है। ऐसे में टिकाऊ और जंग-रोधी निर्माण तकनीकों को अपनाने से सार्वजनिक निवेश की उपयोगिता बढ़ाई जा सकती है।
इसके साथ ही भविष्य में होने वाले बड़े आर्थिक नुकसान को कम करने और देश के विकास को अधिक स्थायी बनाने में मदद मिल सकती है।



