
देहरादून में दिव्यांगजन सशक्तिकरण को समर्पित “दिव्य कला मेला” का रविवार को गरिमामय समापन हुआ। 21 फरवरी से 1 मार्च 2026 तक आयोजित इस विशेष मेले में देश के 16 से अधिक राज्यों से आए दिव्यांग उद्यमियों और कलाकारों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर अपनी प्रतिभा, कौशल और उद्यमिता का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। यह आयोजन न केवल व्यापारिक दृष्टि से सफल रहा, बल्कि सामाजिक समावेशन की दिशा में भी एक सशक्त पहल साबित हुआ।
आयोजन का उद्देश्य और सरकारी सहयोग
यह भव्य आयोजन दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार के मार्गदर्शन और सहयोग से संपन्न हुआ। मेले का मुख्य उद्देश्य दिव्यांगजन उद्यमियों को एक सशक्त विपणन मंच प्रदान करना, स्वरोजगार को प्रोत्साहित करना, कौशल विकास को बढ़ावा देना और समाज में समान भागीदारी सुनिश्चित करना रहा। इस पहल ने यह स्पष्ट किया कि उचित अवसर और सहयोग मिलने पर दिव्यांगजन किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं।
विविध उत्पादों की प्रदर्शनी और उल्लेखनीय बिक्री
मेले में हस्तशिल्प, जूट एवं बांस उत्पाद, वुडक्राफ्ट, वस्त्र एवं टेक्सटाइल, पेंटिंग, ऑर्गेनिक उत्पाद तथा पैकेज्ड खाद्य सामग्री जैसे अनेक आकर्षक उत्पादों का प्रदर्शन और विक्रय किया गया। पूरे आयोजन के दौरान लगभग 50 लाख रुपये की बिक्री दर्ज की गई, जो दिव्यांग उद्यमियों के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
समापन समारोह में विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति
समापन समारोह में सुबोध उनियाल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उनके साथ विधायक खजानदास, सचिव संस्कृत शिक्षा उत्तराखंड सरकार दीपक गैरोला, आयुक्त दिव्यांगजन सशक्तिकरण उत्तराखंड प्रकाश चंद्र तथा निदेशक दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग भारत सरकार प्रदीप ए सहित अनेक गणमान्य अतिथियों ने कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई। वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि संस्थागत सहयोग और उचित मंच मिलने पर दिव्यांगजन उद्यमी आत्मनिर्भर बनकर राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
निरंतर पुनर्वास शिक्षा (CRE) और जागरूकता कार्यक्रम
मेले के दौरान 23 से 25 फरवरी तक निरंतर पुनर्वास शिक्षा (CRE) कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें लगभग 120 प्रतिभागियों ने भाग लेकर पुनर्वास एवं विशेष शिक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं। 23 फरवरी को दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के अंतर्गत 21 प्रकार की दिव्यांगताओं और संबंधित अधिकारों पर विशेष जागरूकता सत्र आयोजित किया गया, जिसमें भी लगभग 120 प्रतिभागी शामिल हुए।
रोजगार मेले से मिली नई संभावनाएं
26 फरवरी को आयोजित रोजगार मेले में निजी क्षेत्र की छह कंपनियों ने भाग लिया। इस दौरान 150 दिव्यांग अभ्यर्थियों ने साक्षात्कार दिया, जिनमें से 65 को शॉर्टलिस्ट किया गया और 12 अभ्यर्थियों को सीधे जॉब ऑफर प्रदान किए गए। यह पहल दिव्यांग युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खोलने में सफल रही।
निःशुल्क चिकित्सा और नेत्र परीक्षण शिविर
26 और 27 फरवरी को आयोजित निःशुल्क चिकित्सा शिविर में 200 से अधिक लाभार्थियों को स्वास्थ्य परीक्षण, चिकित्सकीय परामर्श और दवाइयां उपलब्ध कराई गईं। वहीं 28 फरवरी को आयोजित निःशुल्क नेत्र परीक्षण शिविर में लगभग 150 लाभार्थियों को सेवाएं प्रदान की गईं। इन स्वास्थ्य सेवाओं ने मेले को सामाजिक सेवा के एक व्यापक मंच के रूप में स्थापित किया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
मेले के दौरान प्रतिदिन सांस्कृतिक कार्यक्रम, लोकनृत्य और संगीत प्रस्तुतियां आयोजित की गईं। समापन अवसर पर “दिव्य कला शक्ति” कार्यक्रम में 50 से अधिक दिव्यांग कलाकारों ने अपनी प्रतिभा का अद्भुत प्रदर्शन कर उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया।
सशक्त मॉडल के रूप में उभरा “दिव्य कला मेला”
“दिव्य कला मेला – देहरादून” ने दिव्यांगजन सशक्तिकरण, रोजगार संवर्धन और सामाजिक समावेशन के क्षेत्र में एक प्रेरणादायक मॉडल प्रस्तुत किया। आयोजन समिति ने भविष्य में इसे और व्यापक स्तर पर विस्तार देने का संकल्प व्यक्त किया, ताकि अधिक से अधिक दिव्यांगजन उद्यमियों और कलाकारों को लाभ मिल सके।



