
पिथौरागढ़। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश के बीच धारचूला-तवाघाट राष्ट्रीय राजमार्ग पर बुधवार को बड़ा संकट सामने आया। पहाड़ से गिरे पत्थरों और भारी बोल्डरों की चपेट में आने से कूलागाड़ पुल क्षतिग्रस्त हो गया। पुल को नुकसान पहुंचने के बाद इस महत्वपूर्ण मार्ग पर यातायात व्यवस्था प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है।
पुल क्षतिग्रस्त होने के बाद BRO ने संभाला मोर्चा
कूलागाड़ पुल को नुकसान पहुंचने की सूचना मिलते ही सीमा सड़क संगठन (BRO) की टीम सक्रिय हो गई। अधिकारियों और कर्मचारियों ने मौके पर पहुंचकर पुल की स्थिति का निरीक्षण किया। मार्ग पर यातायात को जल्द से जल्द सामान्य करने के लिए अब वैकल्पिक डायवर्जन तैयार करने का काम शुरू कर दिया गया है।
BRO के मुताबिक, डायवर्जन तैयार करने का लक्ष्य बुधवार शाम तक रखा गया है। इसके बाद यातायात को वैकल्पिक मार्ग से संचालित करने का प्रयास किया जाएगा, ताकि लोगों को आवाजाही में ज्यादा परेशानी न हो।
सीमांत क्षेत्र की कनेक्टिविटी पर बढ़ा दबाव
धारचूला-तवाघाट मार्ग सीमांत क्षेत्र के लिए बेहद अहम माना जाता है। ऐसे में कूलागाड़ पुल का क्षतिग्रस्त होना केवल यातायात बाधित होने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे सीमांत इलाकों की कनेक्टिविटी पर भी असर पड़ने की आशंका है।
लगातार बारिश के कारण पहाड़ियों से पत्थरों और बोल्डरों के गिरने का सिलसिला सड़क सुरक्षा के लिए भी चिंता बढ़ा रहा है। इससे इस संवेदनशील पहाड़ी मार्ग पर सफर करने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
डायवर्जन तैयार होने का इंतजार
फिलहाल लोगों की नजर BRO की ओर से तैयार किए जा रहे डायवर्जन पर टिकी है। डायवर्जन का काम पूरा होने तक धारचूला-तवाघाट मार्ग पर आवाजाही को लेकर लोगों में चिंता बनी हुई है। प्रशासन और संबंधित एजेंसियों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती मार्ग को सुरक्षित तरीके से जल्द बहाल करना है।



