
ऊधमसिंह नगर जिले के रुद्रपुर में बचपन को मजदूरी के दलदल से बचाने के लिए प्रशासन ने एक बड़ी कार्रवाई की है। बाल श्रम उन्मूलन की दिशा में कदम उठाते हुए श्रम प्रवर्तन अधिकारी के नेतृत्व में आज शहर के भीतर एक विशेष और सघन चेकिंग अभियान चलाया गया। इस औचक छापेमारी से बाल श्रम कराने वाले प्रतिष्ठान संचालकों में हड़कंप मच गया।
टास्क फोर्स और सीडब्ल्यूसी की संयुक्त टीम ने मारा छापा
इस महत्वपूर्ण रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए श्रम विभाग, बाल कल्याण समिति (CWC) की टीम और जिला टास्क फोर्स ने एक संयुक्त मोर्चा तैयार किया। टीम ने रुद्रपुर मुख्य बाजार क्षेत्र के विभिन्न व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, ढाबों और दुकानों का बेहद बारीकी से निरीक्षण किया।
वर्कशॉप में रिंच-पेचकस थामे मिला मासूम बचपन
बाजार क्षेत्र में सघन निरीक्षण के दौरान टीम जब एक ऑटोमोबाइल वर्कशॉप (गैराज) पर पहुँची, तो वहाँ एक मासूम बच्चा गाड़ियों की मरम्मत के काम में लगा हुआ पाया गया। जब प्रशासनिक टीम ने बच्चे के दस्तावेजों और उम्र की जांच की, तो उसकी आयु 14 वर्ष से भी कम पाई गई।
कानून का डंडा: बच्चा रेस्क्यू, नियोजक के खिलाफ एफआईआर दर्ज
बाल श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2016 के कड़े प्रावधानों का उल्लंघन पाए जाने पर टीम ने तत्काल एक्शन लिया। मासूम बच्चे को उस दमनकारी माहौल से मुक्त कराकर रेस्क्यू किया गया। वहीं, कानून को ताक पर रखकर बच्चे से मजदूरी कराने वाले वर्कशॉप मालिक (नियोजक) के खिलाफ नियमानुसार प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली गई है और पुलिस ने अग्रिम विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है।
श्रम विभाग की सख्त चेतावनी: उल्लंघन पर होगी जेल और भारी जुर्माना
इस बड़ी कार्रवाई के बाद श्रम विभाग ने जिले के सभी व्यापारियों, होटल-ढाबा संचालकों और नियोजकों को कड़ा संदेश जारी किया है। विभाग ने अपील और चेतावनी देते हुए कहा है कि:
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14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को किसी भी तरह के काम पर रखना पूरी तरह गैरकानूनी और दंडनीय अपराध है।
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14 से 18 वर्ष के किशोरों (Adolescents) को किसी भी प्रकार की खतरनाक या जोखिमभरी प्रक्रियाओं/कामों में नियोजित न किया जाए।
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यदि भविष्य में किसी भी प्रतिष्ठान में ऐसा उल्लंघन पाया गया, तो बिना किसी रियायत के सीधे जेल और भारी जुर्माने की कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।



