उत्तराखंडराज्य

स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर लूट का आरोप: जन संघर्ष मोर्चा ने खोला ग्राफिक एरा हॉस्पिटल के खिलाफ मोर्चा

उत्तराखण्ड की राजधानी देहरादून में जन संघर्ष मोर्चा के बैनर तले स्वास्थ्य सेवाओं की आड़ में मरीजों के कथित आर्थिक शोषण के खिलाफ एक बड़ा जनाक्रोश देखने को मिला है। मोर्चा के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने धूलकोट स्थित ग्राफिक एरा हॉस्पिटल के खिलाफ तहसील परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद, मुख्यमंत्री को संबोधित एक तीखा ज्ञापन उपजिलाधिकारी (SDM) विनोद कुमार को सौंपा गया। मोर्चा ने अस्पताल प्रबंधन पर बेहद संगीन आरोप लगाते हुए कहा है कि यहाँ मरीजों का मानसिक व आर्थिक शोषण किया जा रहा है, जबरन और अनावश्यक ऑपरेशन किए जा रहे हैं, तथा केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी आयुष्मान योजना में भी बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ियां की जा रही हैं।

भय का माहौल और अनावश्यक महंगे ऑपरेशनों का खेल

प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे मोर्चा अध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल प्रबंधन गंभीर बीमारियों का डर दिखाकर मरीजों और उनके तीमारदारों में खौफ पैदा करता है। इस डर का फायदा उठाकर ऐसे मरीजों के भी महंगे ऑपरेशन और इलाज प्लान कर दिए जाते हैं, जिन्हें असल में इसकी कोई जरूरत ही नहीं होती। अस्पताल केवल भारी-भरकम बिल वसूलने के एजेंडे पर काम कर रहा है।

चौंकाने वाला मामला: 25 लाख का खर्च, सवा लाख में हुआ ठीक

नेगी ने अस्पताल की मनमानी को उजागर करने के लिए एक हालिया वाकये का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि माइनर ब्रेन हेमरेज से पीड़ित एक मरीज को अस्पताल ने डराया कि तुरंत ऑपरेशन न हुआ तो जान को खतरा है और इसके लिए 25 लाख रुपये का एस्टीमेट थमा दिया। डरे हुए परिजनों ने जब सूझबूझ दिखाते हुए दूसरे विशेषज्ञ डॉक्टरों से सलाह ली, तो बिना किसी ऑपरेशन के महज सवा लाख रुपये के खर्च में मरीज पूरी तरह ठीक हो गया और एक हफ्ते में हंसता-खेलता घर लौट आया।

संवेदनहीनता की हद: शव के बदले सवा दो लाख की मांग

मोर्चा ने अस्पताल पर संवेदनहीनता का एक और गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि एक दुर्भाग्यपूर्ण मामले में मरीज की मौत हो जाने के बाद भी अस्पताल प्रबंधन ने परिजनों को शव सौंपने के बदले स्टेंट और अन्य मेडिकल उपकरणों के नाम पर करीब सवा दो लाख रुपये का बिल थमा दिया। जब इस मामले में जन संघर्ष मोर्चा ने सीधे दखल दिया और विरोध किया, तो वही बिल जादुई ढंग से घटकर मात्र 18 से 20 हजार रुपये रह गया, जिसके बाद परिजनों को शव मिल सका।

बाहरी मरीजों से मनमानी वसूली और आयुष्मान योजना में फर्जीवाड़े की आशंका

मोर्चा का आरोप है कि जो मरीज बिना किसी मजबूत सिफारिश के या फिर बाहरी राज्यों से इलाज के लिए यहाँ आते हैं, उन्हें अस्पताल प्रबंधन विशेष रूप से अपना निशाना बनाता है और उनसे मनमाना शुल्क वसूला जाता है। इसके साथ ही, सरकारी धन की बंदरबांट का आरोप लगाते हुए मोर्चा ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के तहत भी फर्जी इलाज दिखाकर सरकारी खजाने को चूना लगाया जा रहा है, जिसकी गहराई से जांच होना बेहद जरूरी है।

उच्चस्तरीय जांच की मांग, न होने पर कोर्ट जाने की चेतावनी

मुख्यमंत्री को भेजे गए ज्ञापन के जरिए जन संघर्ष मोर्चा ने राज्य सरकार से मांग की है कि ग्राफिक एरा हॉस्पिटल की पूरी कार्यप्रणाली, आयुष्मान योजना के क्लेम और मरीजों से की गई अवैध वसूली की एक उच्चस्तरीय व निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों को जेल भेजा जाए। मोर्चा ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने इस गंभीर मामले पर जल्द ही सख्त कदम नहीं उठाए, तो संगठन जनता को न्याय दिलाने के लिए माननीय न्यायालय की शरण लेने को मजबूर होगा। इस आक्रोशपूर्ण प्रदर्शन में मोर्चा के महासचिव आकाश पंवार सहित भारी संख्या में संगठन के पदाधिकारी और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button