नई दिल्लीराज्य

अभाविप ने अनुसंधान एवं विकास में निवेश बढ़ाने पर दिया जोर, राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद बैठक में कई अहम प्रस्तावों पर बनी सहमति

नई दिल्ली में आयोजित अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) की राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद बैठक का रविवार को समापन होने जा रहा है। बैठक के अंतिम दिन शिक्षा, अर्बन माओवाद, महिला सुरक्षा तथा वैश्विक चुनौतियों से जुड़े चार महत्वपूर्ण प्रस्तावों को सर्वसम्मति से पारित किए जाने की तैयारी है।

शिक्षा, सुरक्षा और वैश्विक मुद्दों पर हुई व्यापक चर्चा

देश के विभिन्न राज्यों और प्रांतों से पहुंचे कार्यकर्ता एवं प्रतिनिधियों ने बैठक के दौरान शिक्षा व्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा, वैश्विक परिदृश्य, महिला सुरक्षा और भारतीय अनुसंधान तंत्र जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया। प्रतिनिधियों द्वारा दिए गए सुझावों को ध्यान में रखते हुए प्रस्तावों को अंतिम स्वरूप प्रदान किया गया।

विकसित भारत के लिए अनुसंधान निवेश बढ़ाने की आवश्यकता

बैठक के दौरान अभाविप ने भारतीय उद्योग जगत से अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) के क्षेत्र में अधिक निवेश करने की अपील की। परिषद का मानना है कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए अनुसंधान आधारित अवसंरचना और नवाचार केंद्रित पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना बेहद जरूरी है।

उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के बीच समन्वय पर जोर

अभाविप के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि भारत को वैश्विक स्तर पर अग्रणी राष्ट्र बनाने के लिए सरकारी संस्थानों, उद्योग जगत और शैक्षणिक संगठनों के बीच प्रभावी सहयोग आवश्यक है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में देश में अनुसंधान एवं विकास पर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का एक प्रतिशत से भी कम खर्च किया जाता है, जिसमें प्रमुख योगदान सरकारी संस्थानों का है।

उभरती प्रौद्योगिकियों में निवेश बढ़ाने की अपील

डॉ. सोलंकी ने भारतीय उद्योगपतियों और उद्यमियों से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), क्वांटम प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा, जैव प्रौद्योगिकी तथा स्वच्छ और हरित ऊर्जा जैसे भविष्य उन्मुख क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने का आग्रह किया। उनका मानना है कि उद्योग जगत के संसाधनों और शैक्षणिक संस्थानों की विशेषज्ञता का समन्वय आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को नई दिशा और गति प्रदान कर सकता है।

शिक्षा को बताया राष्ट्र निर्माण का आधार

उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल रोजगार प्राप्त करने का साधन नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र निर्माण, ज्ञान सृजन और नवाचार की नींव है। उनके अनुसार अनुसंधान एवं विकास में बढ़ा हुआ निवेश भारत की तकनीकी क्षमता को मजबूत करने के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक नेतृत्व की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

भारत को नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था बनाने की जरूरत

अभाविप का मानना है कि यदि देश में अनुसंधान, नवाचार और तकनीकी विकास को पर्याप्त प्रोत्साहन मिले तो भारत वैश्विक प्रतिस्पर्धा में और अधिक मजबूत स्थिति हासिल कर सकता है। इसके लिए सरकार, उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच दीर्घकालिक साझेदारी विकसित करना समय की मांग है।

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