
देहरादून। उत्तराखंड कांग्रेस के पूर्व सैनिक विभाग ने ‘सैन्यधाम’ परियोजना के निर्माण में हो रही देरी, लगातार बढ़ती लागत और इसके कथित राजनीतिक इस्तेमाल को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। विभाग के अध्यक्ष कर्नल (से.नि.) रामरतन नेगी ने परियोजना में पारदर्शिता की मांग करते हुए सैन्यधाम के प्रभारी मंत्री गणेश जोशी के इस्तीफे की मांग की है।
बढ़ती लागत और निर्माण में देरी पर उठाए सवाल
प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कर्नल रामरतन नेगी ने सैन्यधाम के निर्माण से जुड़े आंकड़े सामने रखे:
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घोषणा और शिलान्यास: नवंबर 2019 में तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सैन्यधाम की घोषणा की थी, जिसके बाद 2021 में इसका शिलान्यास किया गया।
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लागत में भारी अंतर: शुरुआत में परियोजना की अनुमानित लागत करीब 63 करोड़ रुपये थी, जो आरटीआई (RTI) से मिली जानकारियों के अनुसार 2024 तक बढ़कर लगभग 99 करोड़ रुपये पहुंच गई है।
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दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग: कांग्रेस ने सरकार से मूल और संशोधित DPR, टेंडर दस्तावेज, स्वीकृतियां, भुगतान विवरण और गुणवत्ता जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने को कहा है।
‘चुनावी लाभ’ वाले बयान पर मंत्री के इस्तीफे की मांग
कर्नल नेगी ने प्रभारी मंत्री गणेश जोशी के उस कथित बयान पर कड़ा ऐतराज जताया, जिसमें उन्होंने सैन्यधाम से ‘चुनावी लाभ’ मिलने की बात कही थी:
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शहीदों का अपमान: सैन्यधाम देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर जवानों का स्मारक है, इसे किसी राजनीतिक दल का चुनावी मंच नहीं बनाया जा सकता।
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PM से स्पष्टता की मांग: उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी सैन्यधाम के लोकार्पण और इसकी वास्तविक स्थिति पर स्थिति स्पष्ट करने की अपील की।
“सैनिकों का सम्मान पूरे देश का विषय”
कांग्रेस की वरिष्ठ नेता एवं पूर्व सैनिक विभाग की उपाध्यक्ष सुजाता पॉल ने कहा:
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1,734 शहीद परिवारों का आंगन: ‘शहीद सम्मान यात्रा’ के दौरान प्रदेश भर के 1,734 शहीद परिवारों के आंगन से मिट्टी लाकर सैन्यधाम की नींव रखी गई थी।
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राजनीति से ऊपर: एक सैनिक का समर्पण किसी पार्टी के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्र रक्षा के लिए होता है। शहादत को चुनावी लाभ से जोड़ना शहीद परिवारों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ है।
प्रेस वार्ता में उपस्थित प्रमुख लोग
इस दौरान कर्नल मोहन सिंह रावत, कैप्टन बचन सिंह, कैप्टन कुशल राणा, लेफ्टिनेंट साहदेव शर्मा, हवलदार बलबीर सिंह, सूबेदार सिरजीत कृशाली, हवलदार हरेंद्र सिंह बिष्ट और युवा इंटक अध्यक्ष पंकज सिंह क्षेत्री सहित कई पूर्व सैनिक मौजूद रहे।



