उत्तराखंडराज्य

भारतीय सेना का ‘माउंट त्रिशूल’ पर्वतारोहण अभियान रुड़की से रवाना, 7,120 मीटर ऊंची चोटी फतह करेंगे सैपर्स

हरिद्वार। भारतीय सेना की ‘कोर ऑफ इंजीनियर्स’ के माउंट त्रिशूल पर्वतारोहण अभियान दल को रुड़की स्थित बंगाल इंजीनियर ग्रुप एंड सेंटर से औपचारिक रूप से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। गढ़वाल हिमालय में स्थित 7,120 मीटर (23,360 फीट) ऊंची माउंट त्रिशूल चोटी पर चढ़ाई का यह अभियान सेना के साहस और अदम्य इच्छाशक्ति का प्रतीक है।

वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने बढ़ाया उत्साह

अभियान के फ्लैग-ऑफ समारोह के दौरान भारतीय सेना के कई शीर्ष अधिकारी मौजूद रहे:

  • लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता (जीओसी-इन-सी, सेंट्रल कमांड)

  • लेफ्टिनेंट जनरल विकास रोहेला (इंजीनियर-इन-चीफ)

  • लेफ्टिनेंट जनरल एसएस दहिया (कर्नल कमांडेंट, बंगाल सैपर्स एवं मिलिट्री सर्वे)

इस अवसर पर कोर ऑफ इंजीनियर्स के अनुभवी पर्वतारोहियों ने भी दल के सदस्यों से बातचीत कर उनका मनोबल बढ़ाया।

माउंट त्रिशूल: दुर्गम रास्ते और कठिन चुनौतियां

गढ़वाल हिमालय की माउंट त्रिशूल चोटी को फतह करना बेहद चुनौतीपूर्ण माना जाता है:

  • कठिन परिस्थितियां: अत्यधिक ऊंचाई, खतरनाक इलाके और तेजी से बदलता मौसम इस अभियान को कठिन बनाते हैं।

  • वास्तविक परीक्षा: यह चढ़ाई जवानों की शारीरिक सहनशक्ति, तकनीकी दक्षता, मानसिक मजबूती और संकट प्रबंधन क्षमता की कड़ी परीक्षा लेगी।

कड़ा अभ्यास और गहन तैयारियां

अभियान दल में अनुभवी सैन्य अधिकारी, जूनियर कमीशंड अधिकारी (JCOs) और अन्य रैंक के जवान शामिल हैं। दल ने विशेष तैयारी की है:

  • हाई-एल्टीट्यूड ट्रेनिंग: ऊंचाई वाले वातावरण में ढलने (Acclimatization) का विशेष अभ्यास।

  • कठोर शारीरिक व तकनीकी प्रशिक्षण: पर्वतारोहण की आधुनिक तकनीकों और सुरक्षा उपायों पर विशेष ध्यान।

  • लॉजिस्टिक्स प्रबंधन: दुर्गम रास्तों और बदलती परिस्थितियों से निपटने के लिए एक व्यापक रणनीति तैयार की गई है।

ऑपरेशनल ब्रीफिंग और ‘एक्सपेडिशन फ्लैग’ की सुपुर्दगी

समारोह की शुरुआत टीम लीडर की प्रस्तुति और ऑपरेशनल ब्रीफिंग से हुई, जिसमें रूट मैप, सुरक्षा प्रोटोकॉल और आपातकालीन योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई।

  • सैन्य मूल्यों का विकास: लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता ने जवानों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे अभियान नेतृत्व, अनुशासन, टीमवर्क और सोच-समझकर जोखिम उठाने की क्षमता विकसित करते हैं—जो अत्यधिक ऊंचाई वाले सैन्य ऑपरेशन्स के लिए बेहद जरूरी हैं।

  • औपचारिक रवानगी: समारोह के अंत में टीम लीडर को ‘एक्सपेडिशन फ्लैग’ सौंपकर अभियान दल को बेस कैंप के लिए रवाना किया गया।

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